भोपाल। मध्यप्रदेश विधानसभा चुनाव में उम्मीदवारों के नामों को लेकर कांग्रेस में मैराथन बैठकें शुरू हो गई हैं। कल से शुरू हुई बैठक आज भी जारी हैं। जहां जिला प्रभारियों और जिला अध्यक्षों से उम्मीदवारों के नाम लिए गए हैं। वहीं कांग्रेस पार्टी में मध्य प्रदेश के इंचार्ज जनरल सेक्रेटरी रणदीप सिंह सुरजेवाला ने संगठन का काम अपने हाथ में ले लिया है। उन्होंने सभी जिलाध्यक्षों से कहा कि सुरजेवाला ने कहा कि, मुझे देखने में यह भी आया है कि पिछले दो महीने से जिलों में निष्क्रियता देखी जा रही है, मंडलम सेक्टरों की बैठक नहीं हो रहा ही। अब कमलनाथ प्रदेश देखेंगे अर्थात चुनाव का काम देखेंगे। संगठन का काम मैं देखूंगा। आप दिल्ली आइए मुझसे मिलिए, मैं सीधी बात करूंगा।
मप्र के प्रभारी सुरजेवाला, स्क्रीनिंग कमेटी के चेयरमैन भंवर जितेंद्र सिंह और सदस्य अजय सिंह लल्लू और सांसद सत्यगिरी उल्का ने जिलाध्यक्ष और प्रभारियों की बैठक को संबोधित किया। उन्होंने पार्टी संगठन के नेताओं से कहा कि जो नेता पिछले 2 चुनाव हार चुके हों, टिकट के लिए उनके नामों की सिफारिश ना करें। यदि परिस्थिति वश जरूरी हुआ तो इस मामले में कमलनाथ फैसला करेंगे। यह बैठक दिन भर चलती रही। शुरुआत ग्वालियर-चंबल संभाग से हुई। फिर सागर, रीवा, उज्जैन व इंदौर संभाग के जिलों के प्रभारियों और जिलाध्यक्षों से वन-टू-वन चर्चा हुई।
वहीं सुरजेवाला और जितेंद्र सिंह एआईसीसी के सर्वे की रिपोर्ट सामने रखकर बैठे थे, जिससे जिला अध्यक्षों और प्रभारियों के पैनल से टैली कर रहे थे। सुरजेवाला ने जिलाध्यक्षों से पैनल में प्रत्याशियों के नाम नीचे करने पर पूछा तो जिलाध्यक्ष जवाब नहीं दे पाए। उन्होंने कहा कि उम्मीदवार के साथ जातीय समीकरण हैं तो नाम तीसरे की जगह पहले नंबर पर क्यों नहीं लिया। इस प्रकार सुरजेवाला ने बड़ी मीटिंग में खुलासा कर दिया कि कांग्रेस पार्टी के कुछ जिलाध्यक्ष पैनल में नामों का निर्धारण करते समय पार्टी और चुनाव की परिस्थितियों के बजाय अपनी व्यक्तिगत पसंद को ज्यादा महत्व दे रहे हैं।
कांग्रेस ने बैठक में यह स्पष्ट कर दिया कि उनकी पहली पसंद जातिवादी नेता, जिसे अपनी जाति के सबसे ज्यादा वोट मिलते हो और दूसरी पसंद नया चेहरा है। शनिवार और रविवार की गतिविधियों से स्पष्ट हो गया कि मध्यप्रदेश में कांग्रेस पार्टी चुनावी मैदान में इस बार कई नए-नए चेहरों को उतारेगी। पूरी कांग्रेस बदली-बदली सी नजर आएगी। केवल कमलनाथ ही पुराना चेहरा होंगे।
अब कमलनाथ प्रदेश देखेंगे। संगठन का काम मैं देखूंगा। आप दिल्ली आइए मुझसे मिलिए, मैं सीधी बात करूंगा।