जबलपुर। कमिश्नर अभय कुमार वर्मा ने कहा है कि बायोडीजल भविष्य का ईंधन है और सरकार भी बायोडीजल को बढ़ावा दे रही है, लेकिन इसकी प्रकृति है कि इसे लंबे समय तक सुरक्षित नहीं रखा जा सकता है। वे आज पंडित लज्जा शंकर मॉडल स्कूल जबलपुर में संचालित ज्ञानाश्रय निःशुल्क कोचिंग क्लासेस के छात्र छात्राओं को बायोडीजल, सीएनजी, आरएनजी,नाभिकीय रिएक्टर आदि के बारे में समझा रहे थे। इस दौरान संयुक्त संचालक आदर्श परिवार एवं आधुनिक नालंदा निःशुल्क कोचिंग क्लासेस सोनू प्रकाश और रामलखन मीणा, शिक्षक संतोष सेंगर , नमन भारती एवं अंकित योगी और छात्र छात्राएं उपस्थित थे।
आयुक्त वर्मा ने कहा कि बायोडीजल पारंपरिक या 'जीवाश्म' डीजल के समान एक वैकल्पिक ईंधन है। बायोडीजल एक वनस्पति तेल या पशु वसा आधारित डीजल ईंधन है। इसका उपयोग पारंपरिक डीजल ईंधन के स्थान पर डीजल इंजन में किया जाता है। बायोडीजल का उत्पादन सीधे वनस्पति तेल, पशु तेल / वसा, चर्बी और वेस्ट कुकिंग ऑयल से किया जा सकता है।सरकार के नियमानुसार डीजल में 20% से अधिक बायोडीजल नहीं मिलाया जा सकता है। उन्होंने कहा कि CNG गैस हवा से भी हल्की होती है, यही कारण है कि इस गैस का इस्तेमाल कुकिंग के लिए नहीं किया जाता है। यह गैस कम प्रदूषण फैलाने के साथ यह पेट्रोल और डीजल की तुलना में सस्ती होती है। ऐसे में वाहन चालक ईंधन के रूप में इसका अधिक इस्तमाल करते है। उन्होंने कहा कि भारत का पहला परमाणु रिएक्टर 'अप्सरा' है जिसका शुभांरभ 4 अगस्त, 1956 को किया गया था। साथ में कहा की वर्तमान में, भारत में 22 नाभिकीय रिएक्टर काम कर रहे है और कहा संपूर्ण दुनिया में सबसे ज्यादा नाभिकीय रिएक्टर यूएसए(93) के पास है।
उल्लेखनीय हैं कि कलेक्टर सौरभ कुमार सुमन की पहल और आदर्श परिवार एवं आधुनिक नालंदा के डायरेक्टर परीक्षित भारती के सहयोग से जबलपुर में 01 मार्च से यूपीएससी एवं एमपीपीएससी की तैयारी के लिए निःशुल्क कोचिंग क्लासेज नियमित संचालित की जा रही है।