इंदौर। श्री मध्यभारत हिन्दी साहित्य समिति में प्रति शुक्रवार को आयोजित होने वाले कार्यक्रम “सृजन विविधा” में आज युवा रचनाकारों के साथ वरिष्ठ साहित्यकारों ने भी कविता पाठ किया। इसमें देशभक्ति, समाज और अध्यात्म जैसे विषयों का समावेश रहा। जयंत तिकोझर ने सस्वर सरस्वती वंदना “विद्या दायिनी” सुनाकर गोष्ठी का वातावरण साहित्यमय कर दिया।
नयन राठी की रचना “बच्चों से उम्मीद”, मुकेश तिवारी “शब्द खंगाल रहा था”, मृत्युजंय बैरागी “हमारा भारत” तथा गोविंद भगरोल के देशभक्ति पूर्ण गीत, किशोर यादव का अव्यवस्थित यातायात पर व्यंग्य एवं राजेन्द्र कश्यप कबीर का पद सुनाकर गोष्ठी को अध्यात्म की ओर ले गए। युवा कवि डॉ. राकेश गोस्वामी की पंक्तियां “दुनिया की इस भीड़ में रहते हैं सब अकेले...” तथा आकाश यादव की नशामुक्ति “ये वही नशा है, जो मर्यादा के बाल पकड़कर खींच रहा है, नशा ही करना है तो देशभक्ति का करो...” पक्तियों को खूब सराहना मिली और उन्हें इस कविता पर समिति के अर्थमंत्री राजेश शर्मा ने एक हजार रुपए का नगद पुरस्कार देकर सम्मानित किया।
हरेराम वाजपेयी का गीत “राह तेरी रही, पांव मेरे रहे और चलता रहा मैं तुम्हारे लिए...” सराहा गया। संचालन कर रही डॉ. पद्मा सिंह ने “दर्द के गीत” और “हवा का साथ” दो रचनाएं प्रस्तुत की। उनकी ये पंक्तियां “तब भी हम साथ-साथ थे, तब आंसुओं में ही एक नशा था...” की प्रशंसा की गई। स्वागत एवं आभार प्रधानमंत्री अरविन्द जवलेकर ने व्यक्त किया। इस अवसर पर जे. सुरेन्द्र, घनश्याम यादव, राजेश शर्मा आदि भी श्रोता के रूप में उपस्थित रहे।