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February 9, 2024, 12:22 pm
माँ काली की पूजा कर शुरू हुआ लुनाई चिराई का काम, भंवरासा में किसान ने डोड़ो में लगाया चीरा, फसल की सुरक्षा के लिए कड़े प्रबंध, पढ़े खबर 

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नीमच। मालवा मेवाड़ की प्रसिद्ध फसल कहे जानी वाली काला सोना अफीम की फसल का कार्य किसानों द्वारा शुरू कर दिया गया हैं। इसके साथ ही किसानों ने अफीम की सुरक्षा के लिए भी कड़े प्रबंध किए हुए हैं। 
पालसोडा के समीप ग्राम भंवरासा में किसान राजेंद्रसिंह चौहान द्वारा अफीम के खेत में माँ काली व देवताओ की स्थापना के साथ साथ पूजा अर्चना कर अफीम की फसल की लुनाई चिराई शुरू कर दी हैं। 
भंवरासा के अफीम किसान राजेंद्रसिंह चौहान ने बताया कि अफीम फसल हर किसान के लिए मान-सम्मान का विषय होता है। ऐसे में डोडो पर पहला चीरा लगाने से पूर्व पांच मूर्तियां स्थापित कर मां काली की पूरे विधि विधान से शुभ मुहूर्त में पूजा की जाती है। पूजा के बाद पांच डोडो में टांका (चीरा) लगाया जाता है। कहते हैं कि मालवा मेवाड़ की खास कहे जाने वाली अफीम की फसल काला सोना के नाम से प्रख्यात हैं। अफीम की फसल की निगरानी के लिए किसानो ने अपने खेतो पर कड़े इंतज़ाम भी कर रखे हैं। तो वही अफीम के डोडे की निगरानी के लिए दिन रात चौकीदारी भी करना पड़ रही हैं। क्यों की जब तक कार्य पूरा नहीं हो जाता तब तक किसानों को यह चिंता सताती रहती है कि अफीम की फसल को कोई तस्कर नुकसान न पहुंचा दे। क्षेत्र में अफीम का कार्य शुरू होने के साथ ही अफीम तस्कर सक्रिय हो गए हैं। अफीम की फसल को बच्चों की तरह पालना पड़ता है। बोवनी से लेकर लुनाई-चिराई के बाद तक किसान बेहद सतर्कता से अफीम की खेती करते है।

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