नीमच। गणगौर पर्व का चेत्र कृष्ण प्रतिपदा से प्रारंभ होकर चैत्र शुक्ल तृतीया को गणगौर पूजन कर समापन किया जाता हैं। गणगौर का शाब्दिक अर्थ है गण अर्थात शिव और गोरा पार्वती। इस पर्व पर शिव-पार्वती की पूजा की जाती है। प्रतिवर्ष अनुसार माहेश्वरी महिला मंडल द्वारा गणगौर के झेलसेवरा निकाला गया। यह झेल सेवरा गांधी वाटिका से प्रारम्भ होकर, पुस्तक बाजार, घंटाघर होती हुई माहेश्वरी भवन पहुंची। झेल सेवरा को गणगौर के सामने पूजा में रखा गया। महिला मंडल द्वारा सास-बहू, देवरानी-जेठानी बनकर एक जैसा श्रृंगार किया गया। साथ ही झेल सजाओ प्रतियोगिता रखी गई एवं आकर्षक गेम भी खेले गए। बड़ी संख्या में समाज की महिलाओं ने भाग लिया स कार्यक्रम में अध्यक्ष वैजयंती माला तोतला, सचिव शारदा गट्टानी, कोषाध्यक्ष मालती मुंदड़ा, उपाध्यक्ष अनीता समदानी, सहसचिव कंचन अजमेरा, सांस्कृतिक सचिव सपना मंडोवरा, आरती मुंदड़ा, अर्पिता सोनी, अर्चना बाहेती, गुंजन दरक, जिज्ञासा लोगड, प्रांजल मुच्छाल सहित कई महिलाएं उपस्थित रही।