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July 25, 2024, 5:39 pm
KHABAR : दिगम्बर जैन समाज में चातुर्मास प्रवचन श्रृंखला प्रवाहित, वैराग्य सागर जी महाराज ने कहा- जो मिला है उसी में संतुष्ट रहे तभी जीवन सुखमय होगा, पढ़े खबर 

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नीमच। जीवन में संतुष्टि की आदत डालना चाहिए। ईश्वर ने दिया है उसमें संतुष्ट रहेंगे तो जीवन सुखमय हो जाएगा। मृत्यु से पहले मन को ईश्वर से जोड़ कर अपना सब कुछ ईश्वर को समर्पित कर दे क्योंकि सब कुछ ईश्वर का ही दिया है। मन को प्रभु भक्ति में लगाए। भगवान की भक्ति करें तपस्या करें तो जीवन का कल्याण हो सकता है।यह बात वैराग्य सागर जी महाराज साहब ने कही। वे श्री पार्श्वनाथ दिगंबर जैन समाज नीमच द्वारा दिगम्बर जैन मंदिर‌ में आयोजित धर्म सभा में बोल रहे थे। 
उन्होंने कहा कि वैज्ञानिक कहते हैं कि मनुष्य चंद्रमा पर पहुंच गया है लेकिन वास्तविक चंद्रमा तक नहीं पहुंचा है। ज्योतिषशास्त्र के ज्ञान के कारण सूर्य ग्रहण कब होगा इसका ज्ञान पहले से ही हो जाता है। मंदिर में प्रवेश से पूर्व में हाथ व पांव को धोना चाहिए। यदि जिनालयो मंदिरों की शुद्धि नहीं होगी तो परिणाम में भी शुद्ध नहीं मिलते है। मंदिरों की शुद्धि के लिए 81 मंत्र होते हैं। वर्धमानसागर जी महाराज के सुशिष्य मुनि सुप्रभ सागर जी मसा ने ने कहा कि एक बार में एक ही कार्य करना चाहिए जो मिला, जितना मिला उसी में संतुष्ट रहना चाहिए। प्रकृति से मैत्री रखेंगे तो आत्मा को शांति अवश्य मिलती है। पुण्य बढ़ता है तो सब कुछ मिलता है। जीवन में आत्म कल्याण कैसे हो इसका लक्ष्य बनाना चाहिए तभी जीवन में आगे बढ़ सकते हैं। पशु अपनी गति नहीं सुधार सकते हैं। मनुष्य जन्म ही एकमात्र जन्म है जिसमें व्यक्ति अपनी गति को‌ भक्ति तप कर  सुधार सकता है।
परम पूज्य चारित्र चक्रवर्ती 108 शांति सागर जी महामुनि राज के आचार्य पदारोहण के शताब्दी वर्ष मे परम पूज्य मुनि 108 श्री वैराग्य सागर जी महाराज एवं परम पूज्य मुनि 108 श्री सुप्रभ सागर जी महाराज जी का पावन सानिध्य मिला। दिगम्बर जैन समाज एवं चातुर्मास समिति के अध्यक्ष विजय विनायका जैन ब्रोकर्स, मिडिया प्रभारी अमन विनायका ने उक्त‌ जानकारी ने दी।

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