नीमच। वरिष्ठ समाजसेविका एवं कांग्रेस नेत्री मधु बंसल ने केंद्र सरकार की आर्थिक एवं विदेश नीति पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि भाजपा सरकार विदेशी दबाव में राष्ट्रीय हितों और छोटे व्यापारियों के हितों से समझौता कर रही है। उन्होंने विशेष रूप से ‘टैक्सेशन एंड अदर लॉज (अमेंडमेंट) बिल, 2026’ में डिजिटल भुगतान से जुड़े प्रावधानों को लेकर चिंता जताई।
मधु बंसल ने कहा कि UPI वर्तमान में देश के डिजिटल भुगतान तंत्र की महत्वपूर्ण आधारशिला है। उनके अनुसार, नए कानूनी प्रावधानों से भविष्य में अधिसूचना के माध्यम से UPI सहित कुछ डिजिटल भुगतान माध्यमों पर शुल्क लगाने का रास्ता खुल गया है। उन्होंने आशंका जताई कि यदि MDR लागू होता है तो इसका असर छोटे व्यापारियों और दुकानदारों पर पड़ सकता है।
छोटे व्यापारियों पर अतिरिक्त बोझ की आशंका-
बंसल ने कहा कि छोटे व्यापारी पहले से ही GST अनुपालन, महंगाई और बढ़ती प्रतिस्पर्धा जैसी चुनौतियों का सामना कर रहे हैं। ऐसे में डिजिटल भुगतान पर किसी भी प्रकार का अतिरिक्त शुल्क उनके लिए आर्थिक दबाव बढ़ा सकता है। उन्होंने सरकार से मांग की कि छोटे कारोबारियों और आम उपभोक्ताओं के हितों को ध्यान में रखते हुए UPI भुगतान को सरल और कम लागत वाला बनाए रखा जाए।
उन्होंने अमेरिकी व्यापार नीति और विदेशी कंपनियों के हितों को लेकर भी केंद्र सरकार पर सवाल उठाए। बंसल ने दावा किया कि सरकार ने पूर्व में भी विभिन्न आर्थिक एवं व्यापारिक नीतियों में विदेशी दबाव के सामने समझौते किए हैं। उन्होंने इसे देश की रणनीतिक एवं आर्थिक स्वायत्तता के लिए चिंता का विषय बताया।
नोटबंदी और GST को लेकर भी साधा निशाना-
मधु बंसल ने नोटबंदी और GST के क्रियान्वयन को लेकर भी केंद्र सरकार की आलोचना की। उन्होंने कहा कि इन नीतियों का छोटे व्यापारियों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा और अब डिजिटल भुगतान व्यवस्था में संभावित शुल्क से उनकी मुश्किलें और बढ़ सकती हैं।
उन्होंने सरकार से मांग की कि UPI जैसे डिजिटल भुगतान माध्यमों को आम नागरिकों एवं छोटे व्यापारियों के लिए सुलभ बनाए रखा जाए तथा किसी भी नए शुल्क से पहले उसके आर्थिक प्रभाव का व्यापक आकलन किया जाए।
मधु बंसल ने कहा कि सरकार की आर्थिक नीतियों का उद्देश्य छोटे व्यापारियों, मध्यम वर्ग और आम उपभोक्ताओं को राहत देना होना चाहिए, न कि उन पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ डालना।