मंदसौर। जिले के नई आबादी शास्त्री कॉलोनी के जैन दिवाकर स्वाध्याय भवन शनिवार को धर्मसभा का आयोजन किया गया। जिसमें जैन साध्वी रमणीककुंवरजी ने कहा कि अधिकांश मनुष्य लोभ की कामना को लेकर धर्म आराधना करते है। लोभ की प्रवृत्ति मनुष्य को उसकी धर्म आराधना का फल नहीं मिलने देती है। जब भी हम कोई मंदिर या धर्मस्थान पर जाते है तो धन सम्पत्ति परिवार का सुख या पुत्र कामना के लिये प्रार्थना करते है यह हमारे लोभ की प्रवृत्ति है मनुष्य को अपनी लोभ की प्रवृत्ति से बचना चाहिए। हम लोभ की प्रवृत्ति को छोड़कर ही धर्म करे तथा प्रभु भक्ति में संलग्न हो और दान पुण्य करें।
भक्ति में प्रदर्शन नहीं करें-
साध्वी ने आगे कहा कि प्रभु भक्ति में सादगी होना चाहिए न कि धन वैभव सम्पत्ति का अनावश्यक प्रदर्शन। आपने भक्ति में अनावश्यक प्रदर्शन पर कहा कि भक्ति अंतर आत्मा की विषय वस्तु है न कि बाहर की। हम प्रभु भक्ति मन से करे प्रदर्शन से नहीं। आपने इस अवसर पर प्रभु महावीर के अनुयायी दशाभद्र राजा का वृतान्त भी बताया। जिन्होंने पहले तो धन वैभव का प्रदर्शन किया लेकिन बाद में धन वैभव को छोड़ संयम ग्रहण कर लिया। उस राजा की भक्ति को देख इंद्र ने भी पूरे मनोभाव से उसकी भक्ति भावना से अनुमोदना की।