चीताखेड़ा। मित्रता दो ह्रदयों को बांधने वाली प्रेम डोर होती हैं। मित्रता की तलाश मनुष्य की सहज वृत्ति है सच्चे मित्र के प्रति उसका सौभाग्य है मित्रता मन की प्यास है, जिसके लिए मनुष्य तड़पता और वह बड़ा ही भाग्यवान है जिसकी यह प्यास बुझ जाती हैं। गुरु के बिना भव सागर नहीं जा सकते,बिना गुरु के मानव के जीवन में गौर अंधेरा हैं। अगर कोई गुरु नहीं बना सको तो तो हनुमानजी को गुरु बना लेना।सुदामा ब्रह्मज्ञानी थे,ब्रह्म को जानने वाले थे सुदामा,ग्रहस्थि में रहते हुए भी विरक्त थे,सुदामा कोई साधारण नहीं थे।सुदामा जानते थे की गुरु माता द्वारा दिए गए ये चने श्रापित हैं,अपने मित्र श्रीकृष्ण को दरिद्रता से बचाने के लिए खुद ने श्रापित चने खा कर दरिद्रता को अपने उपर ले ली।40वर्ष तक सुदामा ने दरिद्रता झेली,जिसके पास संतोष नहीं है वो दरिद्र हैं,सुदामा गरीब नहीं थे।
उक्त वाणी कथा मर्मज्ञ पं.चंद्रदेव जी महाराज ने ग्राम चीताखेडा में पुराना हायर सेकेण्डरी स्कूल परिसर में ग्राम वासियों द्वारा आयोजित साप्ताहिक श्रीमद भागवत ज्ञान गंगा प्रवचन के दौरान अंतिम दिन सोमवार को अपने मुखारविंद से प्रवाहित करते हुए कही।पं.चंद्रदेव जी महाराज ने कथा का रसास्वादन करवाते हुए कहा कि किसी कपटी मित्र की मित्रता केवल शब्दों तक ही सीमित होती हैं ऐसे विश्वासघाती मित्रों के भावों में धोखा होता है किंतु भाषा में सरलता- मधुरता रहती है।मृत्यु शरीर की होती है आत्मा की नहीं, आत्मा अजर अमर है आत्मा कभी नहीं मरती। आत्मा को पानी गला नहीं सकता, अग्नि जला नहीं सकती और हवा सुखा नहीं सकती है। स्वयं की अपनी पुरुषार्थ पर कमाई की गयीं संपत्ति की कद्र होती हैं,छल कपट से सोने की लंका हथीयाई ,सौ-सौ पुत्र होते हुए भी अंत में कुछ नहीं स्वयं का व खानदान का अस्तित्व भी मिट गया।
सर्वप्रथम व्यास पीठ पर पौथी पूजन मुख्य यजमान के रूप में नंदराम पटेल, हरिश -हुकमीचंद सोनी, पृथ्वीराज मंडावरा,दिनेश दायमा, छगन लाल परमार, कारुलाल परमार, भंवरलाल बसेर,मेघराज माली, राधेश्याम परमार,मदनलाल माली, प्रभु लाल बसेर सहपरिवार ने की। कथा समिति के पदाधिकारियों द्वारा कथा मर्मज्ञ पं.चंद्रदेव जी महाराज का साल श्रीफल भेटकर सम्मान किया । वहीं अत्याधुनिक वाद्य यंत्र सुमधुर स्वर लहरियों की छटा बिखेरी संगीतकार कलाकार आर्गन वादक विष्णु बारेठ,महेश बारेठ,ढोलक वादक सत्यनारायण वैष्णव,आक्टोपेड वादक दशरथ लक्षकार कर सम्मान किया। प्रतिदिन श्रीमद् भागवत कथा समिति के सदस्यों ने श्रीमद् भागवत ज्ञान गंगा महोत्सव प्रवचन में प्रारंभ से आखिर तक पूरी कथा में सराहनीय सेवा बनाय रखी।कथा पंडाल मे प्रारंभ मे विधि विधान वैदिक मंत्रोच्चार के साथ हवन किया गया। साप्ताहिक श्रीमद् भागवत ज्ञान गंगा महोत्सव के अंतिम दिन कथा की पूर्णाहुति पर प्राचार्य सुजानमल मांगरिया के सहयोग से महाप्रसाद वितरण करवाई गई।जिनका श्रीमद् भागवत कथा समिति द्वारा साफा बंधवाकर सम्मानित किया गया।कथा में प्रारंभ से पूर्णाहुति तक पुलिस प्रशासन की और से थाना प्रभारी मनोज सिंह जादौन के निर्देशानुसार पुलिस चौकी प्रभारी आर.के.सिंघावत के मार्गदर्शन में पुलिस अरक्षिका सुनिता धाकड़,आरक्षक विनोद कुमार बोराना, आरक्षक अशोक पाटीदार पूरी तरह से तैनात रहे। भागवत कथा समिति ने साल ओढ़ाकर सम्मानित किया गया।
मुस्लिम भाई ने किया श्रीमद् भागवत पौथी पूजन-
मुस्लिम कौम के अंजुमन कमेटी के पूर्व सेकेट्री रजाक शेख ने कथा पंडाल में व्यास मंच पर पहुंच कर श्रीमद् भागवत पौथी का पूजन कर पंडित चंद्रदेव महाराज को साफा बंधवाकर सम्मान कर आशीर्वाद लिया।
इन्होंने निभाया किरदार-
कथा पंडाल में प्रवचन के दौरान सुदामा चरित्र प्रसंग पर स्वचालित झांकी प्रस्तुत की गई जिसमें सुदामा ( श्वैता जावरिया ), श्री कृष्ण ( टीना जावरिया ), रुकमणी ( भूमिका जावरिया ) द्वारा स्वांग धरा गया है जो श्रद्धालुओं केंद्र का आकर्षण बना।
श्रीमद भागवत कथा प्रवचन के दौरान बीच बीच मे अत्याधुनिक वाध्ययंत्र की मधुर स्वर लहरियों पर पं.चंद्रदेव जी द्वारा मिठे मिठे भजन बता मेरे यार सुदामा रे भई गणे दिना में आया.............,चले श्याम से मिलने सुदामा...............,कैसे आऊरे कन्हैया थारी द्वावारिका नगरी बडी दूर नगरी............,अरे द्ववारपालो जाके कन्हैया से कहदो द्वार पे सुदामा आया है..............., हर बात को तुम् भूलों बलै माँ -बाप को मत भूलना...............आदि भजनों पर श्रद्धालु पूरी भक्ति भावना उडेलते हुए पूरे मनोभाव से नृत्य कर रहे हैं।
इन्होंने की शिरकत-
जिला कांग्रेस अध्यक्ष अनिल चौरसिया, जिला कार्यवाहक ब्रजेश सक्सेना, मंडी पूर्व सदस्य राजेन्द्र सिंह तोमर, सरपंच प्रतिनिधि नरेन्द्र सिंह राणावत जैन समाज के वरिष्ठ विजय कुमार जैन, पूर्व उप-सरपंच रतनलाल माली सहित कई वरिष्ठजन भागवत कथा में विशेष रूप से शिरकत कर व्यास पीठ पर जाकर पोथी पूजन कर पं. चंद्रदेव जी महाराज का आर्शीवाद लिया। प्रतिदिन हजारों श्रद्धालुओं ने कथा का पूरी शिद्दत के साथ श्रवण किया। श्रीमद भागवत ज्ञान गंगा 24 दिसम्बर2024से30दिसम्बर2024 सोमवार तक पं.चंद्रदेव जी महाराज के द्वारा अपने मुखारविंद से प्रतिदिन श्रद्धालुओं को रसास्वादन करवाया ।श्रद्धालुओं ने भी प्रतिदिन ज्ञान गंगा में डुबकीयां लगाई।कथा प्रवचन के अंत में विशेष महाआरती के बाद महाप्रसाद वितरण के साथ ही साप्ताहिक कथा की पूर्णाहुति के साथ कथा का विश्राम हुआ।कथा पंडाल से शाम 4 बजे डीजे व गाजे बाजे के साथ शौभायात्रा प्रारंभ हुई जो गांव के विभिन्न मार्गों से होती हुई हनुमान जी मंदिर पर पहुंची।