छतरपुर। जिला की राजनगर तहसील के ग्राम पंचायत ललपुर के गरीब परिवार में जन्मी आरजू खान, फरिश्ता हिन्दुस्तानी, हिना खान तीनों बहनें कबड्डी में कर रही गांव और जिले का नाम रोशन, तीनों बहनों ने पहाड़ी के पास ग्राउंड बना कर 2 घंटे प्रतिदिन करती हैं प्रैक्टिस
फरिश्ता हिंदुस्तानी एक गरीब घर से है इनके पास खुद की किट जो कबड्डी खेलने के लिए जरूरी होती है वह भी नही थी अपनी सहेलिए से मांगे जूते किसी से अन्य जरूरी सामान लेकर खेलती कबड्डी। घर पर मां की डाट खाई। लगभग 12 साल पहले उठ गया था. उस समय फरिश्ता हिंदुस्तानी लगभग 8 से 10 साल की होगी लेकिन पिता का साया उठने के बावजूद इस खिलाड़ी ने हिम्मत नहीं हारी, मां बहिन के साथ मेला और घर घर जाकर चूड़ियां बेचकर परिवार का भरण पोषण करती हैं।
तीनों बहनों ने गांव की मिट्टी में पत्थरों के बीच Youtube, फेसबुक पर वीडियो देख करके कबड्डी सीखी।
रोज 2 घंटे सुबह शाम कबड्डी की प्रेक्टिस करने लगी पहले ललपुर स्कूल की ओर से कबड्डी खेलते हुए चयन हुआ उसके बाद जब कॉलेज राजनगर में पहुंची तो कॉलेज से खेली तथा टीम का प्रतिनिधित्व किया और जिले की टीम में भी चयन हुआ उसके बाद संभाग की टीम मे भी चयन हुआ तथा जब BA लास्ट ईयर था उसे तो उस साल सागर संभाग की ओर से खेलते हुए फरिश्ता हिंदुस्तानी का चैन महाराष्ट्र नांदेड़ जो टीम खेलने गई थी अंतर राज्य टीम में भी चुना गया। महाराजा छत्रसाल यूनिवर्सिटी से MA करते हुए तीन बार अंतर राज्य यूनिवर्सिटी खेलने का मौका मिला महाराष्ट्र नांदेड़ , अमरावती, छतरपुर में भी फरिश्ता हिंदुस्तानी व उनकी टीम मेहनत करती रही 2,3 राउंड के मैच तक अपनी टीम को जिताया फरिश्ता हिंदुस्तानी का चौथी वार अंतर राज्य यूनिवर्सिटी महिला कबड्डी प्रतियोगिता में चयन महाराष्ट्र के अमरावती मे खेल का जोहर दिखाया।