चित्तौड़गढ़। हम सभी इस बात को जानते हैं कि किसी प्रकार के नशे के दुष्प्रभाव के कारण व्यक्ति और समाज को असीम हानि उठानी पड़ती है, स्वास्थ्य बिगड़ता है बुद्धि बल घटना है क्रिया शक्ति नष्ट होती है निंदा होती है।
यह विचार प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय में राज योगिनी आशा दीदी ने व्यक्त किये। उन्होंने कहा कि इसी नशे के कारण बच्चे कु संस्कारी बनते हैं। दुर्व्यवहारशनों में इतने सारे नकारात्मक असर के बावजूद भी सभी प्राणियों में श्रेष्ठ होने का दावा करने वाले मनुष्य को क्या आज इतनी भी समझ नहीं है कि उसे किस वस्तु का सेवन करना चाहिए। तंबाकू और शराब ने तो सर्वसाधारण को अपने चंगुल में फंसा कर रखा है कई पीढ़ी की पीढ़ियां उसमें बर्बाद हो चुके हैं। तंबाकू एक ऐसा विषैला पदार्थ है जो मनुष्य की प्रकृति और शारीरिक क्षमता नष्ट करता है।
उन्होंने बताया कि इन जहरीले पदार्थ के प्रभाव से तंबाकू सेवन करने वाले व्यक्ति को कैंसर हार्ट अटैक रक्तचाप असंतुलन तथा शारीरिक कमजोरी जैसे रोग हो जाते हैं मस्तिष्क की क्षमता शिथिल हो जाती है स्वभाव चिड़चिड़ा हो जाता है। अनिद्रा बेचौनी उदासी और निराशा के भाव तंबाकू के प्रभाव से व्यक्तित्व का अंग बन जाते हैं । उन्होंने कहा कि जब तक हम सोचते रहेंगे कि मुझे आदत छोड़नी है तब तक हम उसे छोड़ नहीं पाएंगे। संकल्प लीजिए मैं मुक्त हूं मुझे किसी चीज की लत नहीं है, यही संकल्प रोज दोहराएं, जैसे ही विचार बदलेंगे आपकी ऊर्जा बदलेगी और व्यसन खुद छूट जाएगा। उन्होंने बताया कि सभी सेवा स्थान पर विश्व तंबाकू निषेध दिवस मनाया सभी ने नारे लगाए तंबाकू बीड़ी मौत की सीढ़ी तंबाकू गुटका जेब को झटका इस तरह के सभी ने नारे लगाए, लेकिन इनको आत्मसात करने की आवश्यकता है।