नीमच। जिले के धनेरिया कला गांव में स्थित शासकीय स्कूल का भवन जर्जर हालत में पहुंच चुका है, जो अब बड़ा हादसा घटित करने की आशंका को जन्म दे रहा है। स्कूल परिसर के पांच कमरे पूरी तरह खंडहर हो चुके हैं। इन कमरों की छतों पर पेड़ उग आए हैं, दीवारें झड़ चुकी हैं, और खिड़कियां टूटकर लटक रही हैं। खास बात यह है कि यह भवन वर्षों से इसी हालत में है, लेकिन शासन-प्रशासन की नजर अब तक इस ओर नहीं गई है।
गंभीर चिंता का विषय यह है कि बरसात के मौसम में इन कमरों में बाहर से आए आदिवासी मामा लोग रात गुजारते हैं। ऐसे में यदि अचानक दीवार या छत गिर जाए तो जानमाल की बड़ी हानि हो सकती है। भवन की खतरनाक स्थिति के बावजूद यहां कोई चेतावनी बोर्ड या सुरक्षा घेरा नहीं लगाया गया है।
इतना ही नहीं, जर्जर भवन के ठीक सामने आंगनवाड़ी केंद्र भी संचालित होता है, जहां छोटे बच्चे प्रतिदिन शिक्षा ग्रहण करने आते हैं। साथ ही स्कूल के सामने ही पंचायत भवन भी स्थित है, लेकिन किसी भी अधिकारी या जनप्रतिनिधि की नजर इस ओर नहीं पड़ी है। ग्रामीणों का कहना है कि गांव में होने वाले शादी-विवाह जैसे बड़े कार्यक्रम भी इसी स्कूल ग्राउंड में आयोजित होते हैं, जिससे आमजन की जान को भी अनदेखे खतरे का सामना करना पड़ता है।
शिक्षा विभाग को दिया आवेदन, पर अब तक नहीं मिली सुनवाई-
इस मामले में जब वॉइस ऑफ एमपी के संवाददाता रतन पंडित ने ग्राम पंचायत धनेरिया कला के सरपंच राजेश राठौर से चर्चा की, तो उन्होंने बताया कि एक साल पहले ही बरसात के मौसम में इस समस्या को लेकर शिक्षा विभाग को आवेदन प्रस्तुत किया गया था, लेकिन अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है। हमने बार-बार इस ओर ध्यान दिलाया, लेकिन विभागीय स्तर पर गंभीरता नहीं दिखाई गई। वहीं पंचायत सचिव प्रेम सिंह चुंडावत ने बताया कि तहसीलदार साहब को आवेदन देकर जर्जर भवनों को गिराने की मांग की गई है।
ग्रामीणों का कहना है कि जब तक कोई बड़ा हादसा नहीं होता, तब तक संबंधित विभागों की नींद नहीं खुलती। प्रशासन से मांग की गई है कि जल्द से जल्द जर्जर भवन को गिराया जाए या उसकी मरम्मत कर सुरक्षित बनाया जाए, ताकि किसी भी अप्रिय घटना से बचा जा सके।
जनहित में आवश्यक है तत्काल कार्रवाई-
धनेरिया कला की स्थिति किसी भी दिन बड़ा हादसा कर सकती है। ऐसे में जिला प्रशासन, शिक्षा विभाग और जनप्रतिनिधियों को चाहिए कि वे तत्परता दिखाते हुए इस मुद्दे पर संज्ञान लें और जर्जर भवन को लेकर त्वरित कार्रवाई करें, ताकि ग्रामीणों और बच्चों की जान जोखिम में न पड़े।