शाजापुर। मध्यप्रदेश श्रमजीवी पत्रकार संघ शाजापुर इकाई ने जिला प्रशासन की कार्यवाही को द्वेषपूर्ण करार देते हुए मुख्यमंत्री से दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग की है।
जानकारी के अनुसार संघ के जिला अध्यक्ष एवं अधिमान्य पत्रकार अभिषेक सक्सेना को शुजालपुर चक्काजाम प्रकरण में 28 अगस्त को कलेक्टर न्यायालय से साधारण सूचना पत्र जारी किया गया था। इस पत्र की तामिल 27 अगस्त गणेश चतुर्थी के शासकीय अवकाश वाले दिन शुजालपुर के कार्यपालिक मजिस्ट्रेट के.एल. चौहान, जमादार लियाकत, पुलिसकर्मी शिवनारायण सेन व अन्य कर्मचारियों द्वारा सक्सेना के आवासीय परिसर में स्थायी वारंटी की तरह की गई।
पत्रकार संघ का आरोप है कि सूचना पत्र देने के नाम पर प्रशासनिक अमले ने दिनभर उनके निवास के चक्कर लगाए और कर्मचारियों को धमकाते हुए कहा कि पत्रकार प्रशासन के पक्ष में समाचार प्रकाशित करें, अन्यथा परिणाम भुगतने पड़ेंगे। इतना ही नहीं, सूचना पत्र पर यह लिखकर कि “तामिल लेने से इंकार किया गया“, उसे चस्पा कर फोटो खींची गई और बाद में वापस निकाल लिया गया।
घटना की जानकारी मिलते ही अन्य पत्रकार भी मौके पर पहुंचे और अधिकारियों से सवाल किए। वीडियोग्राफी में कार्यपालिक मजिस्ट्रेट यह कहते हुए सुने गए कि उन्हें कलेक्टर के निर्देश थे। संघ का कहना है कि साधारण सूचना पत्र की तामिल के लिए पुलिस बल सहित पूरा अमला भेजना प्रशासन की नीयत पर सवाल खड़े करता है।
पत्रकारों का आरोप है कि इस कार्रवाई के जरिए जिला प्रशासन पत्रकार संघ के अध्यक्ष की छवि धूमिल करने का प्रयास कर रहा है। इस संबंध में शुजालपुर मंडी थाने में भी शिकायत आवेदन दिया गया है।
विशेष तौर पर कालापीपल ब्लॉक इकाई के पत्रकारों ने इस मामले को गंभीर मानते हुए तहसील कार्यालय पहुंचकर तहसीलदार संदीप श्रीवास्तव को मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा।
ब्लॉक अध्यक्ष अनिल शर्मा के नेतृत्व में दिए गए इस ज्ञापन में स्पष्ट कहा गया है कि जिला प्रशासन की कार्रवाई लोकतंत्र और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर सीधा प्रहार है। संघ ने मांग की कि दोषी अधिकारियों के खिलाफ तुरंत कठोर कार्रवाई हो, अन्यथा चरणबद्ध आंदोलन किया जाएगा।
ज्ञापन सौंपने के दौरान संयुक्त सचिव हरविंदर सिंह पाहुजा, उपाध्यक्ष राकेश अग्रवाल, कैलाश नांदौडा, संदीप गेहलोत, मनमोहन शर्मा, भगवान सिंह अहिरवार, राजाराम बारोड, देवेंद्र पाहुजा, मुकेश अहिरवार आदि पत्रकार मौजूद रहे।