नीमच। पुणे में साल 1976 में रेकोंडों कम्पनी ने एक सडक बनाई थी, जिसे जे.एम.रोड के नाम से जाना जाता है। 10 साल की गारन्टी से बनी यह सडक इतने दशक बीत जाने के बाद भी गड्ढों से मुक्त है। सुना है कि इसके बाद इस कम्पनी को वहां कोई काम नहीं दिया गया।
हम इस बात पर गर्व कर सकते हैं कि हमारे शहर में कोई सडक नहीं बनी जो पूरे एक साल भी गड्ढों से मुक्त रही हो। सोचिये अगर अच्छी सडक बना दी जाएगी तो नई सडक नहीं बनेगी। नई सडक नहीं बनेगी तो सडक बनाने वाले को ठेका नहीं मिलेगा। ठेका नहीं मिलेगा तो कम्पनी बंद हो जाएगी। कम्पनी बंद हो जाएगी तो कई लोग बेरोजगार हो जाएंगे।
हर साल नई सडक बनाने के कई फायदे हैं। इससे डामर बनाने वाली कम्पनी का माल बिकता है। उस कम्पनी में काम करने वालों का रोजगार नहीं छीनता। जो ठेकेदार रोड बनाता है उसका काम निरंतर चलता रहता है। नगरपालिका में बाबू, अधिकारी, पार्षद से लगाकर अध्यक्ष तक को उनका हिस्सा मिलता है। इससे सब खुश रहते हैं। सडक साल भर से पहले ही अपने नवीनीकरण के लिये सिग्नल देने लगती है। उसकी गिट्टियां सडक से जुदा होना शुरू हो जाती है। गड्ढों से कितना बचोगे, कहीं न कहीं आपको गड्ढे से मुखातिब होना ही पडेगा और कहीं गिर गये तो सोने पर सुहागा.... डॉक्टर के पास जाना पडेगा। अगर हड्डी टूट गई तो डॉक्टर को तो रोजगार मिलेगा ही आपको भी महीने पन्द्रह दिन आराम करने को मिल जाएगा। एक दो महीने धूल फांकने में ज्यादा से ज्यादा क्या होगा, थोडी बहुत धूल आपके फेंफडों में चली जाएगी, एलर्जी होगी, छींकें आएगी। इससे मेडिकल स्टोर कोफायदा होगा, दवा कम्पनियां अपनी दवाईयां और ज्यादा बेच सकेंगी, मार्केट में रूपया आएगा तो मनी सर्कुलेशन बढेगा तो और चीजें बिकेंगी। हर स्तर पर फायदे ही फायदे हैं।
नगरपालिका को नई सडक बनाने के लिये प्रदेश सरकार से रूपया मिलेगा तो सोचिये राजधानी तक के अधिकारी-मंत्री सब खुश होंगे। खुश होकर नगरपालिका घोषणा करेगी कि 25 करोड की लागत से शहर की सडकों का कायाकल्प किया जाएगा। यह बात अलग है कि यह कभी नहीं बताया जाता कि इसमें से कितना सडक के लिये लगेगा और कितना बंटेगा। सडक बनाने के लिये भूमि पूजन किया जाएगा। रोड रोलर के नीचे नारियल फोडा जाएगा, मिठाईयां बंटेंगी, जनप्रतिनिधि माला पहनेंगे, भाषण होंगे, जनता वहां बैठी ताली बजाएगी।
नई सडक बनने के बाद जब आप उस पर चलेंगे तो खुश होंगे कि चलो नई सडक बन गई। आपकी खुशी हर साल दीवाली की तरह आती रहे, इसलिये सडक ऐसी बनाई जाती है। इसलिए सडकों की बदहाली को कोसने की जगह नई सडक बनने का हर साल की तरह इंतजार कीजिए।