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September 11, 2025, 11:59 am
KHABAR : किसान पाटीदार जैविक खेती कर कमा रहे हैं लाभ, आसपास के किसानों को भी देते है जैविक खाद की सलाह, पढ़े खबर 

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मंदसौर। मंदसौर जिले के गांव रिंडा के निवासी आशीष पाटीदार अपने खेत में जैविक खाद का प्रयोग करते है। उन्होंने केंचुओं के माध्यम से शुद्ध वर्मी कम्पोस्ट (जैविक खाद) का निर्माण शुरू किया है, जिससे न केवल उन्हें अच्छी आमदनी हो रही है, बल्कि आसपास के किसान को भी जैविक खाद उपलब्‍ध करा रहे है एवं उन्‍हे जैविक खेती की सलाह भी दे रहे है। उन्‍होने बताया कि जैविक खेती की शुरवात मंदसौर के उद्यानिकी विभाग से प्रशिक्षण लेकर की। वहां से उन्हें 2 किलो केंचुए और संपूर्ण तकनीकी जानकारी मिली। इसी सहयोग और अपनी मेहनत के बल पर उन्होंने एक वर्ष में 300 कट्टे जैविक खाद का निर्माण किया। उनकी बनाई जैविक खाद को किसानों ने हाथोंहाथ अपनाया - खासकर अफीम और लहसुन की खेती करने वाले कृषकों ने। उन्होंने इसे 500 से 550 रुपये प्रति कट्टा की दर से बेचा है। दलोदा अखिलानंद गौशाला में खुद जैविक खाद बनाते हैं और वहीं से गोबर भी लाते हैं। गौशाला को आत्मनिर्भर बना रहे है इनके पास 10 बीघा जमीन भी है जिसमें ये जैविक खेती करते हैं और अच्छे दामों पर उन फसलों को बेचते है। कृषि विभाग कार्यालय के माध्यम से  बलराम तालाब योजना का लाभ लिया है। बलराम तालाब योजना का लाभ लें, तो जल संरक्षण, जैविक खेती और आय - तीनों क्षेत्रों में उन्नति सुनिश्चित है। 
किसान आशीष पाटीदार जैविक खेती में रासायनिक कीटनाशकों का प्रयोग नहीं करते। इसकी बजाय वे नीम खली, गौमूत्र, दशपर्णी अर्क, और जीवामृत जैसे जैविक तरीकों से कीट नियंत्रण करते हैं। जैविक खाद से आय भी और पर्यावरण की सेवा भी जैविक खाद के निर्माण से आशीष पाटीदार को बेहद अच्छी आय प्राप्त हुई। अब वे इस कार्य को व्यवसायिक रूप से और विस्तार देना चाहते हैं। उनका लक्ष्य है कि आने वाले वर्षों में वे प्रत्येक वर्ष 1000 से 1500 कट्टे जैविक खाद का निर्माण करेंगे। इसके लिए एक नई, छोटी यूनिट की स्थापना की योजना भी बना रहे हैं। वे केवल आय ही नहीं, बल्कि प्रकृति और पर्यावरण की रक्षा को भी समान रूप से महत्व देते हैं। खेत में बची नरवाई (फसल अवशेष) को जलाने के बजाय वे उसे डी-कंपोजर व जीवामृत से सड़ाकर पोषक जैविक खाद में बदलते हैं। यह खाद उनके उत्पादन को बढ़ाने में मदद करती है, और खेत की मिट्टी को भी स्वस्थ बनाए रखती है। खेती सिर्फ मुनाफे का जरिया नहीं, बल्कि प्रकृति से जुड़ने का माध्यम भी है,आशीष पाटीदार का यह मानना है।

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