नीमच। केंद्र सरकार ने आगामी वर्ष 2025-26 के लिए देर रात अफीम पॉलिसी जारी कर दी है। इस बार सरकार ने सीपीएस पद्धति से खेती करने वाले किसानों को भी लुईनी-चिरनी में पट्टे जारी किए हैं। अफीम नीति जारी होने से पहले वॉईस ऑफ एमपी ने किसानों की तमाम मांगों को सरकार के बैठे जनप्रतिनिधियों व अधिकारियों तक पहुंचाया था। इन सभी मांगों पर सरकार ने मुहर लगाते हुए मालवा-मेवाड़ के किसानों को दीपावली से पहले बड़ी खुशी दी है।

कौन होंगे पात्र किसान?
- वे किसान जिन्होंने 2024-25 में अफीम पोस्त की खेती की हो और प्रति हेक्टेयर औसत उपज 4.2 किलो मॉर्फिन से कम न दी हो।
- जिन किसानों ने 2022-23, 2023-24 और 2024-25 में पूरी फसल की जुताई की है, लेकिन 2021-22 में नहीं की थी।
- जिन किसानों की अपील फसल वर्ष 2024-25 के बाद स्वीकार की गई हो।
- 2024-25 में पात्र होने के बावजूद किसी कारणवश खेती न कर पाए किसान।
- मृतक पात्र किसानों के नामित वारिस अथवा कानूनी उत्तराधिकारी।
- वे किसान जिन्होंने 2024-25 में पोस्त भूसा उत्पादन किया और जिनकी औसत उपज 900 किलो प्रति हेक्टेयर या उससे अधिक रही।

लाइसेंस की प्रमुख शर्तें-
- 2024-25 में लाइसेंसशुदा क्षेत्र से 5 प्रतिशत से अधिक अतिरिक्त क्षेत्र में खेती न की हो।
- कभी भी अवैध खेती न की हो और न ही किसी सक्षम न्यायालय में आरोपित हुए हों।
- विभागीय निर्देशों का उल्लंघन न किया हो।

अधिकतम क्षेत्र-
- प्रत्येक पात्र किसान को केवल 10 आरी (एक प्लॉट) में खेती की अनुमति होगी।
- आवश्यकता होने पर भूमि पट्टे पर भी ली जा सकती है।

न्यूनतम उपज की चेतावनी-
फसल वर्ष 2026-27 के लिए पात्रता हेतु किसानों को 2025-26 में कम से कम 5.9 किलो मॉर्फिन प्रति हेक्टेयर उपज देनी होगी।

अन्य प्रावधान-
- अनुसंधान कार्य हेतु सरकार चयनित खेतों का अधिग्रहण कर सकती है।
- भुगतान की गणना राजकीय अफीम एवं अल्कलॉइड फैक्ट्री, नीमच या गाजीपुर द्वारा विश्लेषण पर आधारित होगी।
- किसानों के नाम सीबीएन की वेबसाइट और ऑनलाइन पोर्टल पर प्रकाशित किए जाएंगे।
- मौजूदा लाइसेंसधारियों को दोबारा सभी दस्तावेज जमा करने की आवश्यकता नहीं होगी।

यह अधिसूचना संख्या 02/2025 - स्वापक नियंत्रण-1, साकानि. 622(अ) के तहत जारी की गई है।

सवा लाख पट्टे जारी होने की संभावना-
वरिष्ठ पत्रकार मुस्तफा हुसैन ने बताया कि नई नीति के लागू होने के बाद देश में लगभग 1.25 लाख अफीम पट्टे जारी हो सकते हैं। इनमें से करीब 55 से 60 हजार पट्टे मध्यप्रदेश में मिलने की संभावना है। यानी देश की कुल अफीम खेती का आधा हिस्सा प्रदेश में होगा। कुल मिलाकर इस बार की अफीम नीति किसानों के लिए ऐतिहासिक और लाभकारी मानी जा रही है। बड़े पैमाने पर सीपीएस से लुईनी चिरनी में कन्वर्जन होगा और हजारों किसानों को नए पट्टे मिलने से अंचल में विकास और समृद्धि की नई उम्मीद जगी है।

वॉइस ऑफ एमपी की भूमिका और सांसद का योगदान-
वरिष्ठ पत्रकार मुस्तफा हुसैन ने कहा कि नई नीति में शामिल कई प्रावधानों पर लगातार वॉइस ऑफ एमपी रिपोर्टिंग करता रहा है। वहीं, सांसद सुधीर गुप्ता ने भी केंद्र सरकार तक किसानों की आवाज़ पहुँचाने में अहम भूमिका निभाई है। इस बार सीपीएस में किसानों ने 100 से 160 किलो तक डोडे तुलवाकर यह साबित किया कि उनका तस्करों या तस्करी से कोई नाता नहीं है। इसी का परिणाम है कि सरकार ने सीपीएस पट्टों को लुईनी चिरनी में कन्वर्ट करने का बड़ा निर्णय लिया है। वहीं नई फसल सत्र के लिए 5.9 किलो मॉर्फीन/हेक्टेयर न्यूनतम औसत रखी गई है। जबकि इस बार उत्तराखंड के उधमसिंह नगर और देहरादून में भी अफीम की प्रायोगिक खेती कराने का जिक्र पॉलिसी में किया गया है।

पारदर्शिता और भ्रष्टाचार पर लगाम-
वरिष्ठ पत्रकार मुस्तफा हुसैन ने बताया कि पूर्व नारकोटिक्स उपायुक्त डॉ. संजय मीणा और अफीम फैक्ट्री के जीएम डॉ. नरेश बुंदेल ने लैब टेस्टिंग की प्रक्रिया को पारदर्शी बनाकर किसानों के साथ होने वाले भ्रष्टाचार पर रोक लगा दी है। इसी से यह साबित हुआ कि मालवा-मेवाड़ का किसान ईमानदार और सक्षम है।
