चीताखेड़ा। पंचायत में विकास कार्यों को लेकर सरपंच प्रतिनिधि पर गंभीर आरोप लगे हैं। ग्राम पंचायत के उप-सरपंच विकास प्रजापत सहित 20 में से 18 पंचों ने हस्ताक्षरयुक्त ज्ञापन जिला कलेक्टर को सौंपा है। आरोप है कि स्वीकृत राशि और प्रस्ताव होने के बावजूद भी पंचायत में विकास कार्य जानबूझकर रोके जा रहे हैं।
ग्रामवासियों और पंचों का कहना है कि पिछले तीन सालों में पंचायत में तीन बार सचिव बदले गए, लेकिन तालमेल नहीं बैठ पाया। सचिव का भी आरोप है कि वे विकास कार्यों के लिए तैयार हैं, परंतु सरपंच प्रतिनिधि कोई पहल नहीं करते।
गांव में साफ-सफाई के अभाव में गंदगी फैली है, बारिश में कचरे से सड़ांध और मच्छरों की भरमार हो गई है। कई वार्डों में सीमेंट-कंक्रीट सड़क निर्माण का प्रस्ताव पारित होने और राशि स्वीकृत होने के बावजूद कार्य शुरू नहीं हुआ। वार्ड क्रमांक 2 में कीचड़ की समस्या बनी हुई है।
माली मोहल्ले के शिव मंदिर चबूतरे पर छत निर्माण के लिए 1 लाख रुपये स्वीकृत हुए थे और 2022-23 में भूमि पूजन भी हो चुका था, लेकिन आज तक काम अधूरा है। वहीं पंचायत क्षेत्र में लगे विद्युत खंभों के बल्ब बंद पड़े होने से अंधेरे और सांप-बिच्छुओं का डर बना रहता है।
उप-सरपंच प्रजापत का आरोप है कि सरपंच प्रतिनिधि ने सालभर में केवल दो बार ही पंचायत की बैठक बुलाई। पंचों का कहना है कि सरपंच प्रतिनिधि की तानाशाही के कारण गांव का विकास ठप है और वे अपने वार्डवासियों से किए वादे पूरे नहीं कर पा रहे हैं।
हालांकि, सरपंच व उनके पति ने आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि उप-सरपंच बार-बार पैसों की मांग करता है और झूठी शिकायतें कर रहा है। पंचों ने जिला कलेक्टर से मांग की है कि यदि सरपंच जनहित में कार्य नहीं करना चाहते तो उन्हें पद से हटाकर किसी अन्य व्यक्ति को जिम्मेदारी सौंपी जाए, ताकि शेष कार्यकाल में विकास कार्य शुरू हो सकें।