निम्बाहेड़ा। मालवा-मेवाड़ के शहंशाहे वली हज़रत अब्दुल्लाह शाह (घोड़ादेह वाले बाबा) का 67वां पांच दिवसीय सालाना उर्स मुबारक इस वर्ष भी पूरे अकीदत, शानो-शौकत एवं धार्मिक उल्लास के साथ संपन्न हुआ। उर्स के अवसर पर राजस्थान सहित देश के विभिन्न राज्यों से हजारों की संख्या में जायरीन दरगाह शरीफ पहुंचे और बाबा की मजार पर चादर एवं अकीदत के फूल पेश कर मुल्क में अमन, भाईचारे, खुशहाली और तरक्की की दुआएं मांगीं।
उर्स के अंतिम दिन कुल की रस्म के दौरान दरगाह परिसर में दिनभर जायरीनों की भारी भीड़ उमड़ती रही। पूरा वातावरण रूहानियत, इबादत और सूफियाना रंग में सराबोर नजर आया। श्रद्धालुओं ने बाबा के दरबार में हाजिरी लगाकर अपनी मुरादों की दुआ की।
उर्स के दौरान अकीदतमंदों के लिए विशाल लंगर का आयोजन भी किया गया, जिसमें हजारों लोगों ने शिरकत कर तबर्रुक प्राप्त किया। वहीं देश के ख्यातनाम कव्वालों ने अपनी शानदार सूफियाना कव्वालियों और कलामों की प्रस्तुतियों से देर रात तक महफिल को रौनक बख्शी। इश्क-ए-रसूल और औलिया-ए-किराम की शान में पेश किए गए कलामों ने उपस्थित जायरीनों को भाव-विभोर कर दिया।
उर्स का समापन 28 जुलाई 2026 को बाद नमाज़-ए-मगरिब कुल की रस्म के साथ हुआ। इस अवसर पर सज्जादानशीन, खादिमान एवं बड़ी संख्या में उपस्थित अकीदतमंदों ने देश में अमन-चैन, सामाजिक सद्भाव, तरक्की एवं इंसानियत की सलामती के लिए विशेष दुआएं कीं।
हर वर्ष की भांति इस बार भी हज़रत अब्दुल्लाह शाह (घोड़ादेह वाले बाबा) का सालाना उर्स आपसी भाईचारे, मोहब्बत और सूफी परंपरा के अमर संदेश का साक्षी बना। हजारों श्रद्धालुओं की सहभागिता ने इस धार्मिक आयोजन की भव्यता को और अधिक यादगार बना दिया।