चित्तौड़गढ़। सोशल मीडिया पर भैंस के बच्चे की बलि तथा संरक्षित वन्यजीव खरगोश के निर्मम शिकार के वीडियो वायरल करने के मामले में डीएसटी एवं चंदेरिया थाना पुलिस ने संयुक्त कार्रवाई करते हुए दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने वारदात में प्रयुक्त धारदार तलवार भी बरामद कर ली है।
जिला पुलिस अधीक्षक धर्मेंद्र सिंह ने बताया कि पुलिस मुख्यालय द्वारा चलाए जा रहे विशेष अभियान के तहत अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक गजेंद्र सिंह जोधा एवं वृत्ताधिकारी (ग्रामीण) दिनेश सुखवाल के निर्देशन में डीएसटी टीम एवं थाना चंदेरिया पुलिस ने यह कार्रवाई की।
28 जुलाई 2026 को डीएसटी के एएसआई सूरज कुमार को सुरभि गौ सेवा संस्थान, पाली (ग्रामीण) के अध्यक्ष प्रकाश राजपुरोहित द्वारा सोशल मीडिया मॉनिटरिंग के दौरान इंस्टाग्राम पर वायरल वीडियो की सूचना प्राप्त हुई। वीडियो में एक व्यक्ति द्वारा भैंस के बच्चे (पाड़े) की धारदार हथियार से निर्मम हत्या कर उसकी बलि देने तथा दूसरे वीडियो में एक जंगली खरगोश को जाल में फंसाकर बेरहमी से मारने का दृश्य सामने आया था। इन वीडियो को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म इंस्टाग्राम पर वायरल किया गया था।
प्रकरण की सूचना मिलने पर थाना चंदेरिया में जांच की गई। प्रथम दृष्टया भैंस के बच्चे की बलि देने तथा खरगोश का अवैध शिकार कर उसे मारने की घटना संज्ञेय अपराध की श्रेणी में पाए जाने पर संबंधित धाराओं में प्रकरण दर्ज किया गया।
पुलिस ने आरोपी शोभालाल पिता हरिराम बागरिया निवासी आमोलिया, थाना चंदेरिया के विरुद्ध राजस्थान पशु एवं पक्षी बलि (प्रतिषेध) अधिनियम-1975, पशु क्रूरता निवारण अधिनियम-1960, आर्म्स एक्ट एवं भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस)-2023 की धारा 325 के तहत तथा आरोपी शंकर पिता हरजी बागरिया निवासी आमोलिया, थाना चंदेरिया के विरुद्ध वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम-1972 एवं बीएनएस की धारा 325 के तहत प्रकरण दर्ज किया है।
डीएसटी एवं चंदेरिया पुलिस ने संयुक्त कार्रवाई करते हुए दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर उनका पुलिस रिमांड प्राप्त किया। साथ ही पशु की हत्या में प्रयुक्त धारदार तलवार भी बरामद कर ली गई है। पुलिस आरोपियों की आपराधिक पृष्ठभूमि की जांच कर रही है तथा यह पता लगाया जा रहा है कि उन्होंने पूर्व में भी इस प्रकार के अपराध किए हैं या नहीं।
कार्रवाई में शामिल पुलिस टीम-
थाना चंदेरिया की ओर से थानाधिकारी मधुकंवर राजपुरोहित, हेड कांस्टेबल शक्तिसिंह, कांस्टेबल विक्रमसिंह, शंकरलाल (चालक) एवं अर्जुनलाल शामिल रहे। वहीं डीएसटी टीम में एएसआई सूरज कुमार तथा कांस्टेबल अरविंद, कृष्णकांत, अशोक, जगदीश, शिशपाल, सुरेश सुंडा, देवेंद्र एवं वीरेंद्र ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।