चित्तौड़गढ़। राजस्थान उच्च न्यायालय द्वारा जनहित याचिका में पारित किये गए निर्देश एवं राजस्थान राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के आदेशों की पालना में जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, चित्तौड़गढ के सचिव सुनील कुमार गोयल द्वारा पैनल टीम के साथ चित्तौड़गढ़ जिले के विद्यालयों के भवनों का सैंपल, रैंडम, औचक निरीक्षण 15 से 17 सितंबर के मध्य किया गया। जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की टीम द्वारा जिले के दूरस्थ स्थानों पर ऐसे विद्यालय भवनों का निरीक्षण किया गया, जो कि असुरक्षित व जर्जर स्थिति में थे एवं ऐसे विद्यालयों में वर्तमान में विद्यार्थियों के बैठने की व्यवस्थाओं का भी जायजा लिया गया। टीम के सदस्य के रूप में श्रीमती भारती गहलोत, पैनल अधिवक्ता एवं संदीप सेठिया, प्रो-बोनो अधिवक्ता शामिल थे। जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की टीम द्वारा अन्य विद्यालयों के साथ-साथ दूरस्थ स्थित रा.प्रा.वि. मक्खनपुरा, बेगूं, रा.प्रा.वि. खेमाखेड़ा, भैंसरोड़गढ, रा.प्रा.वि. लक्ष्मीखेडा़ भैंसरोड़गढ, रा.प्रा.वि. खान्दोला, कपासन, रा.प्रा.वि. अम्बेडकर बस्ती जाशमा, भोपालसागर का भी निरीक्षण किया गया। श्री गोयल द्वारा बताया गया कि यथासमय विद्यालय भवनों का उचित रखरखाव ना किये जाने एवं पुराने भवन हो जाने के कारण जर्जर व असुरक्षित हो गए हैं। मुख्यतः राजकीय विद्यालयों की छतों पर पानी का जमाव, साफ-सफाई का अभाव ही भवनों की गुणवत्ता प्रतिकूल रूप से प्रभावित कर रहा है। प्रशासन द्वारा समस्त विद्यालयों की छतों की वॉटर प्रूफिंग किया जाना अति आवश्यक है, ताकि छतों से आने वाला पानी भवन के अन्य भागों को क्षति ना पहुंचाए। उक्त रिपोर्ट राजस्थान राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण, जयपुर के माध्यम से माननीय राजस्थान उच्च न्यायालय के समक्ष दिनांक 19.09.2025 को प्रस्तुत की जावेगी।