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September 20, 2025, 6:08 pm
KHABAR : युवाओं को संस्कार से जोड़े बिना समाज का उत्थान संभव नहीं, महाराज अग्रसेन जयंती पर मुकेश पार्टनर ने लिखा आलेख, पढ़े खबर

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नीमच। एक संपूर्ण समाजवादी साम्राज्य की स्थापना कर सूर्यवंशी महाराज अग्रसेन ने विश्व समुदाय के समक्ष नया आदर्श प्रस्तुत किया। उन्होंने "सब संपत्ति समाज की" की मान्यता को आगे बढ़ाते हुए समाजवाद की अवधारणा का सूत्रपात किया। इसी कारण उन्हें श्री विष्णु अग्रसेन की उपाधि दी गई। यह बात मुकेश पार्टनर ने अपने आलेख के जरिये कही। 

उन्होंने कहा कि आश्विन शुक्ल प्रतिपदा को जन्मे महाराज अग्रसेन भारतीय इतिहास के महान नायकों में गिने जाते हैं। उनका नाम व्यापार, उद्यमिता और समाजवाद का प्रतीक है। माना जाता है कि उनका जन्म लगभग 5200 वर्ष पूर्व त्रेतायुग में हुआ था। वे सूर्यवंशी क्षत्रिय राजा वल्लभ के वंशज थे और महाभारत काल में प्रतापनगर के शासक रहे। उनके शासनकाल में राज्य में सुख-समृद्धि और शांति थी।

महाराज अग्रसेन ने 18 गौत्रों की स्थापना की, जो आज अग्रवाल समाज के रूप में प्रसिद्ध हैं। विवाह परंपरा में अपने ही गौत्र में विवाह वर्जित कर उन्होंने समाज में एकता और भाईचारा बनाए रखने की परंपरा दी। वे न्यायप्रिय, उदार और अहिंसा व शांति के समर्थक शासक थे।

आज की पीढ़ी के लिए महाराज अग्रसेन के आदर्शों से प्रेरणा लेना आवश्यक है। युवाओं को संस्कारों से जोड़ना, सामाजिक कार्यों में उनकी भागीदारी सुनिश्चित करना और आधुनिक मंचों के माध्यम से संवाद स्थापित करना समय की जरूरत है।

युवाओं की भूमिका और समाज की जिम्मेदारी- 
- समाज के संगठन सोशल मीडिया और डिजिटल प्लेटफार्मों के जरिए युवाओं से संवाद बढ़ाएं।
- संयुक्त परिवार की भावना को मजबूत करने, सहयोग और समन्वय बढ़ाने हेतु कार्यक्रम आयोजित हों।
- दहेज प्रथा, अंधविश्वास और अन्य सामाजिक कुरीतियों को मिटाने के लिए जनजागरण अभियान चलाए जाएं।
- समाज के उन युवाओं को सम्मानित किया जाए, जो समाजहित में कार्य कर रहे हैं।
- उद्योगपति और व्यापारी समाज के युवाओं को रोजगार में प्राथमिकता दें, ताकि आत्मनिर्भरता और एकता दोनों को बल मिले।

महाराज अग्रसेन के एक ईंट-एक रुपया सिद्धांत और समाजवाद की अवधारणा आज भी उतनी ही प्रासंगिक है। युवाओं को शिक्षा, रोजगार और अवसर देकर समाज को मजबूत बनाया जा सकता है। हर वर्ष अश्विन शुक्ल प्रतिपदा को मनाई जाने वाली महाराज अग्रसेन जयंती केवल उत्सव नहीं, बल्कि उनके आदर्शों को जीवन में उतारने का संकल्प है।

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