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September 20, 2025, 7:42 pm
BIG REPORT : कांग्रेस जिलाध्यक्ष तरूण बाहेती ने उठाई किसानों की पीड़ा, सोयाबीन के भाव 2500-3000 रुपये क्विंटल, किसानों के साथ अत्याचार, किसान हित में 6 हजार रूपए प्रति क्विंटल करने की मांग, पढ़े खबर 

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नीमच। नई सोयाबीन कृषि मंडी में 2500 से 3000 प्रति क्विंटल के भाव में बिक रही है जों किसानों के सरासर अत्याचार है। पहले ही जिले में अतिवृष्टि से सोयाबीन की फसल बर्बाद हो गई और बारिश से बचे हुए खेतों में भी सोयाबीन की फसल अधिकतम एक बोरी प्रतिबीघा का ही उत्पादन हो रहा है। मंडी में उचित दाम नहीं मिलने से किसानों की लागत तक नहीं निकल पा रही है। वही ऊपर से कटाई के समय बारिश हो जाने से किसान को बची हुई सोयाबीन निकालने में भी दुगनी मजदूरी अदा करनी पड़ रही है। किसान बहुत परेशान है पर क्षेत्र के विधायकों को एवं शासन को इसकी कोई चिंता नहीं है। इधर फसल नुकसानी के लिए अभी तक खेतों को चिन्हित भी नहीं किया गया है, ऐसे में कब सर्वे होगा और कब मुआवजा किसानों को मिलेगा। हालातों के मद्देनजर किसान हित में सायोबीन का समर्थन मूल्य 6 हजार रूपए प्रति क्विंटल कर किसानों को राहत दी जाए। 

कांग्रेस जिलाध्यक्ष तरूण बाहेती ने जिले में सोयाबीन फसल के बिगड़े हालातो पर किसानों की पीड़ा जाहिर करते हुए शासन प्रशासन को गंभीरता से ध्यान देने की मांग करी है। उन्होंने कहा कि प्राकृतिक आपदा अतिवृष्टि के कारण इस बार जिले में करीब 70 फीसदी से ज्यादा सोयाबीन सहित अन्य फसलें खराब हो चुकी है,इधर किसानों को बड़ा झटका मंडी में उपज बेचने के दौरान लग रहा है। सोयाबीन के दाम धड़ाम होकर 2100 से 3000 रूपए प्रति क्विंटल पर आ चुके हैं, जो किसानों को दोहरी मार मारने जैसा हो चुका है। बाहेती ने कहा कि फसल के बिगड़े हालातों से छोटे किसानों का तो जीवन यापन चलाना ही मुश्किल हो रहा है। क्योंकि सोयाबीन की फसल लगतार तीसरे वर्ष खराब हुई है। बाहेती ने कहा कि वर्तमान में कटाई के समय की बारिश ने तो किसानों की कमर ही तोड़ कर रख दी है। पहले ही खरीफ सीजन की शुरुआत में अत्यधिक बारिश के पश्चात सोयाबीन की फसल के फूल पर आने के बाद पीला मोजेक रोग से सोयाबीन सहित अन्य फसलों में दाने नहीं बन सके थे। इससे बोवनी से लेकर कटाई तक लगने वाली लागत भी नहीं निकल पा रही है। कृषि उपज मंडी में किसानों की सोयाबीन उचित मूल्य पर बिके इसके लिए भी प्रशासन को अनिवार्य कदम उठाने चाहिए। बाहेती ने कहा की विडंबना है कि किसानों की इतनी बड़ी परेशानी में भी शासन प्रशासन की ओर से कोई राहत भरी खबर अभी तक नहीं है।

रबी की बोवनी कैसे करें-
बाहेती ने कहा की हालात यह हो  है कि एक बीघा खेत से एक क्विंटल सोयाबीन भी नहीं निकल रही है। ऐसे में रबी सीजन की बोवनी के लिए किसानों के सामने बड़ी परेशानी खड़ी हो जाएगी। खाद-बीज के अलावा अन्य व्यवस्थाओं को करने के लिए भी किसानों को कर्ज लेना पड़ेगा। मौसम की मार से किसानों की फसल पिछले तीन साल से अच्छी नहीं हो पा रही है। बावजूद इसके सरकार को अन्नदाता किसानों को कोई चिंता नहीं है। बाहेती ने कहा की सरकार को किसान हित में कदम उठाते हुए सोयाबीन का समर्थन मूल्य 6 हजार रूपए प्रति क्विंटल करना चाहिए। 

आखिर क्यों चुप है विधायक सांसद- 
कांग्रेस नेता  बाहेती ने कहा बिना सर्वे मुआवजे की मांग को दोहराते हुए कहा कि पीले मोजक,अतिवृष्टि एवं कटाई के समय बारिश की स्थिति किसी से छिपी नहीं है। जिले के विधायक सांसद एवं अन्य जनप्रतिनिधि भी बखूबी इस ख़राब स्थिति से वाकिफ है लेकिन वह प्रशासन पर दबाव बनाने से बच रहे हैं जिले के विधायक सांसद किसानों के पक्ष में क्यों खड़ी नहीं हो रहे हैं। यह उनसे जरूर पूछा जाना चाहिए। जिले के सांसद विधायक ने अभी तक प्रशासन को क्या निर्देशित किया इसका खुलासा भी होना चाहिए। किसानों की परेशानी से क्षेत्र के सांसद सुधीर गुप्ता और विधायकों को कोई चिंता नहीं है।उन्होंने तो सिर्फ सरकार को पत्र लिखकर अपनी जिम्मेदारी से इतिश्री कर ली है।

प्रशासन भी गंभीर नहीं-
बाहेती ने कहा की शासन के नियम है कि फसल की गिरदावरी पूरी करने के पश्चात नुकसान होने का आकलन किया जायें लेकिन विडंबना है की प्रशासन जिले में अभी तक गिरदावरी पूरी नहीं कर पाया है जबकि सोयाबीन फसल खेतों से कटने लगी है। कहने को तो शासन के गिरदावरी ऐप में 25 सितंबर तक गिरदावरी पूरी करने का आदेश है लेकिन यह भी उल्लेखित है कि गिरदावरी शीघ्र पूरी हो जाने पर खेतों के प्लॉट चिन्हित कर नुकसान क्षतिपूर्ति का आकलन भी दर्शाया जाए लेकिन अभी तक जिले में किसी भी पटवारी ने गिरदावरी एप पर क्षतिपूर्ति नुकसान नहीं दिखाई है जबकि खेतों से फसल भी कटने लगी है। इस मामले में प्रशासन अगर गंभीरता दिखाता तो नुकसानी का आकलन लग सकता है। ऐसे में किसानों को यह सीधा-सीधा नुकसान है।

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