नीमच। जिले के सभी आंगनवाड़ी केंद्रों के बच्चों के मानसिक, शारीरिक एवं बौद्धिक विकास के लिए ई.सी.सी.ई. प्रोजेक्ट (अर्ली चाईल्ड केयर एज्युकेशन) पर गंभीरता से कार्य करें। आंगनवाड़ी केंद्रों को सेन्टर आफ लर्निंग के रूप में विकसित करें। यह निर्देश कलेक्टर हिमांशु चंद्रा ने गुरूवार को कलेक्टोरेट सभाकक्ष नीमच में जिला स्तरीय पोषण समिति की मासिक बैठक में सेक्टरवार महिला व बाल कल्याण कार्यक्रमों, योजनाओं की प्रगति की समीक्षा करते हुए दिए। बैठक में जिला पंचायत सीईओ अमन वैष्णव, जिला कार्यक्रम अधिकारी अंकिता पण्ड्या, जिला अधिकारी एवं सभी सीडीपीओ, सेक्टर सुपर वाईजर उपस्थित थे।
बैठक में कलेक्टर ने निर्देश दिए, कि आंगनवाडी केंद्रों और कार्यकर्ताओं की परफार्मेन्स, पोषण भी पढ़ाई भी एवं विभागीय पैरामीटर्स के आधार पर रैकिंग तैयार की जाए। इस रैकिंग के आधार पर बेस्ट तीन कार्यकर्ताओं, आंगनवाडी केद्रों को प्रतिमाह पुरस्कृत, सम्मानित किया जावेगा। आंगनवाड़ी केंद्रों के विकास के लिए प्रोत्साहन स्वरूप फण्ड भी उपलब्ध कराया जाएगा।
बैठक में कलेक्टर ने सभी सेक्टर सुपरवाईजर्स को निर्देश दिए, कि सभी आंगनवाड़ी केंद्रों में तीन वर्ष से उपर की आयु के सभी बच्चों की पूर्व प्राथमिक शिक्षा, अध्यापन पर विशेष ध्यान दे। आंगनवाड़ी के बच्चों को ए.बी.सी.डी., चित्र ज्ञान, अंक ज्ञान, आकृति एवं आकार का ज्ञान होना चाहिए। बच्चों के बौद्धिक एवं मानसिक विकास के लिए जरूरी है, कि आंगनवाड़ी में बच्चों को कार्यकर्ता द्वारा निरंतर रूप से पूर्व प्राथमिक की शिक्षा दी जाए और बच्चों को वर्कबुक पढ़ना व लिखना आना चाहिए। कलेक्टर ने कहा,कि जिले में महिला एवं बाल विकास विभाग विभागीय पैरामीटर्स पर अच्छा कार्य कर रहा है, इसे ओर बेहतर करें।
बैठक में कलेक्टर ने निर्देश दिए, कि सभी आंगनवाड़ी केंद्रो में 85 प्रतिशत बच्चों को प्रतिदिन नियमित रूप से गर्म पका हुआ भोजन उपलब्ध हो। उन्होने 50 प्रतिशत से कम प्रगति वाले सेक्टर सुपरवाईजर को नोटिस जारी करने के निर्देश दिए।
कलेक्टर ने ठिंगनेपन व दुबलेपन वाले बच्चों का पुनरू सत्यापन करवाने के निर्देश दिए। कलेक्टर ने सभी अधिकारियों को सेम एवं मेम श्रेणी के बच्चों का निरंतर फालोअप कर उनके स्वास्थ्य में सुधार लाने और एक माह में लगभग 300 बच्चों को सामान्य श्रेणी में लाने के निर्देश दिए। कलेक्टर ने निर्देश दिए, कि सभी आंगनवाड़ी केंद्र माह में 21 से 25 दिन तक अनिवार्य रूप से खुले, सेम एवं मेम श्रेणी के बच्चों का नियमित फालोअप किया जाए और नियमित रूप से गर्म पका भोजन व माताओं को टी.एच.आर. उपलब्ध करवाया जाए। उन्होने रतनगढ़, नीमच शहरी व जावद परियोजना अधिकारी को एक माह में सुधार के निर्देश भी दिए।