नीमच। विश्वकर्मा समाज ने भाजपा से राजनीतिक भागीदारी की मांग करते हुए विश्वकर्मा कल्याण बोर्ड को भंग किए जाने पर कड़ा विरोध दर्ज कराया है। नीमच की स्वर्णकार धर्मशाला में आयोजित पत्रकार वार्ता में श्री विश्वकर्मा महापंचायत संगठन के पदाधिकारियों ने स्पष्ट कहा कि यदि समाज को सत्ता और संगठन में सम्मानजनक भागीदारी नहीं दी गई तो भाजपा को समर्थन पर पुनर्विचार करना पड़ सकता है।
संगठन के विनय जांगीड़ ने कहा कि 17 सितम्बर केवल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का जन्मदिन नहीं, बल्कि विश्वकर्मा पूजा का पावन दिवस भी है। दुर्भाग्यवश, इसी दिन राज्य सरकार द्वारा विश्वकर्मा कल्याण बोर्ड को समाप्त कर दिया गया, जिससे समाज में आक्रोश व्याप्त है। उन्होंने मांग की कि इस दिन को राष्ट्रीय अवकाश घोषित किया जाए। जांगीड़ ने बताया कि मध्यप्रदेश में विश्वकर्मा समाज के करीब 32 लाख मतदाता हैं और हर विधानसभा में 5 से 10 हजार मतदाता समाज से आते हैं। इसके बावजूद 1956 से अब तक न तो किसी समाज के व्यक्ति को लोकसभा और न विधानसभा का टिकट दिया गया, जो समाज के साथ निरंतर उपेक्षा को दर्शाता है।
संगठन ने मांग की है कि आगामी चुनावों में 5 विधानसभा टिकट, 1 लोकसभा टिकट, 5 पद भाजपा के प्रदेश/जिला संगठन में और निगम-मंडलों में अध्यक्ष या उपाध्यक्ष की जिम्मेदारी दी जाए। संगठन ने स्पष्ट किया कि विश्वकर्मा समाज निर्माण करने वाला समाज है, तोड़ने वाला नहीं। लेकिन सम्मान और भागीदारी की अनदेखी अब और बर्दाश्त नहीं की जाएगी। इस अवसर पर अरविन्द मेवाड़ा, राजेश विश्वकर्मा और शंभूप्रसाद शर्मा भी उपस्थित रहे।