दलौदा। शारदीय नवरात्रि के अवसर पर निपानिया गांव आस्था, परंपरा और इतिहास की त्रिवेणी में सराबोर हो गया। रविवार 28 सितंबर को मुख्य अंबा माता मंदिर परिसर में 21 फीट ऊँचा त्रिशूल विधिविधान से स्थापित किया गया। स्थापना से पूर्व हवन-यज्ञ हुआ तथा पंडित मनीष शर्मा डिगाव ने मंत्रोच्चार के बीच त्रिशूल की पूजा-अर्चना कर स्थापना कराई। इसके बाद महाआरती और प्रसाद वितरण किया गया।
ग्रामीणों का मानना है कि अम्बा माता की प्रतिमा चमत्कारी है और सच्चे मन से मांगी गई मनोकामनाएँ पूरी होती हैं। नवरात्रि के दिनों में मंदिर में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ रही है। भक्त त्रिशूल पर डोरा बांधकर अपनी इच्छाएँ मातारानी से अर्जित कर रहे हैं।
हर शाम गरबे में डूबा गांव
नवरात्रि की संध्याओं में श्री देवनारायण नवदुर्गा गरबा मंडल द्वारा आयोजित गरबा महोत्सव में मां अम्बे की आरती के बाद पारंपरिक गरबे की धूम रहती है। रंग-बिरंगे परिधानों में सजे युवक-युवतियों के साथ आस-पास के गांवों से आए श्रद्धालु भी बड़ी संख्या में हिस्सा ले रहे हैं।
छावा फिल्म ने रचा इतिहास
नवरात्रि के छठे दिन गरबा समिति ने अनूठी पहल करते हुए ऐतिहासिक मराठी फिल्म छावा का प्रदर्शन कराया। पहली बार गांव में बड़ी स्क्रीन पर फिल्म देखने का आयोजन हुआ। कई महिलाओं के लिए यह पहला सिनेमा अनुभव था। फिल्म में छत्रपति शिवाजी महाराज के पुत्र शंभाजी महाराज के संघर्ष और औरंगजेब की क्रूरता को दर्शाया गया, जिसने दर्शकों के मन में देशभक्ति और स्वराज की भावना को प्रज्वलित किया। इस अवसर पर सरपंच प्रतिनिधि बापुलाल डांगी, उपसरपंच राजेंद्र सिंह पंवार, भाजपा पदाधिकारी शिवनारायण वृतिया सहित सैकड़ों ग्रामीण मौजूद रहे।
ग्रामवासियों का सामूहिक सहयोग बना मिसाल
यह आयोजन ग्रामवासियों की आस्था और एकजुटता का प्रतीक बना। नवरात्रि पर निपानिया ने सिद्ध कर दिया कि जब श्रद्धा, परंपरा और संस्कृति एक साथ आती हैं, तो पूरा गांव उत्सव स्थल में बदल जाता है।