देवरी खवासा। नवरात्रि पर्व के नौ दिनों तक माता जगदंबे की भक्ति में रंगे रहे नगरवासी, जहां गरबे और डांडिया की रंगीन छटा ने नगर का माहौल भक्तिमय और उल्लासपूर्ण बनाए रखा। आज नवमी के दिन इस गरबा महोत्सव का भव्य और शांतिपूर्ण समापन हुआ।
अंबे माता मंदिर चारभुजा नाथ परिसर में युवा मित्र मंडल द्वारा पिछले 29 वर्षों से निरंतर गरबे का आयोजन किया जा रहा है, जिसने इस वर्ष भी नगर की सांस्कृतिक परंपरा को जीवित रखा। वहीं प्रजापति मोहल्ले में पहली बार गरबे का आयोजन हुआ, जिसमें युवाओं, महिलाओं और बालिकाओं ने पूरे नौ दिन श्रद्धा और उमंग के साथ मां अम्बे की आराधना की।नवरात्रि के अंतिम दिन मंदिर परिसर और मोहल्ले में विशेष हवन-पूजन कर मां जगदंबे की महाआरती की गई। इसके पश्चात भक्तों को प्रसादी वितरण किया गया। दोनों ही स्थानों पर भक्तिभाव और शांति-प्रिया माहौल के बीच गरबा महोत्सव का समापन हुआ।
नवरात्रि के नौ दिनों तक नगर की गलियां माता के जयकारों और ढोल की थाप से गूंजती रहीं। महिलाओं और बालिकाओं ने पारंपरिक परिधानों में रंग-बिरंगे गरबे खेले तो वहीं युवाओं ने डांडिया की थाप पर समां बांधा। इस दौरान नगर में श्रद्धा, आस्था और आनंद का अद्भुत संगम देखने को मिला।भक्तों का कहना रहा कि नवरात्रि का यह पर्व सिर्फ धार्मिक नहीं, बल्कि सामाजिक समरसता और सांस्कृतिक धरोहर का प्रतीक भी है। नगर में जहां एक ओर माता रानी के गीतों और भजनों ने भक्तों को भाव-विभोर किया, वहीं गरबों ने इस पर्व को अविस्मरणीय बना दिया।
आज सम्पन्न हुए इस आयोजन ने यह साबित कर दिया कि देवरी खवासा न केवल धार्मिक आस्था का केंद्र है बल्कि यहां की सांस्कृतिक परंपराएं भी आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा स्वरूप बनी हुई हैं।