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October 31, 2025, 10:55 am
BIG NEWS : ऑनलाइन वायदा बाजार में करोड़ों की ठगी का पर्दाफाश, खड़ावदा गिरोह पर शिकंजा कसने की मांग, पुलिस की भूमिका पर उठे सवाल, पढ़े कमलेश प्रजापति की खबर 

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गरोठ। मंदसौर जिले में फर्जी वायदा कारोबार के नाम पर चल रहे करोड़ों रुपए के गोरखधंधे का बड़ा खुलासा हुआ है। गरोठ थाना क्षेत्र के खड़ावदा निवासी विजय फरक्या, पुरण फरक्या, महेश पोरवाल, दीपक पटवा और मनीष डबकरा पर आरोप है कि वे “सिग्मा ट्रेडिंग कंपनी” के नाम से लोगों को भारी मुनाफे का लालच देकर निवेश करवाते थे।

प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि आरोपियों ने ऑनलाइन वायदा बाजार के नाम पर फर्जी आईडी बनाकर कई निवेशकों से करोड़ों की ठगी की। शुरुआत में कुछ निवेशकों को मुनाफा दिखाकर विश्वास जीता गया, लेकिन बाद में उनकी आईडी माइनस कर दी गई। बताया गया कि यह पूरा सिस्टम स्थानीय स्तर पर संचालित था और इसका एमसीएक्स या किसी वैध वायदा बाजार से कोई संबंध नहीं था।

व्यापारी ने लगाया ठगी का आरोप, पुलिस पर समझौते का दबाव डालने के आरोप
ग्राम बसई के व्यापारी अनिल मांदलिया ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई कि उक्त गिरोह ने उनसे लगभग एक करोड़ रुपये की ठगी की है। उनका कहना है कि जब उन्होंने सुवासरा थाने और पुलिस अधीक्षक कार्यालय में न्याय की गुहार लगाई, तो पुलिस ने कार्रवाई करने की बजाय समझौते का दबाव बनाया। विरोध करने पर आरोपियों ने उल्टा उन पर ही एससी/एसटी एक्ट के तहत केस दर्ज करवा दिया।

अनिल का कहना है “मैंने कर्ज लेकर और दुकान गिरवी रखकर निवेश किया, लेकिन पुलिस ने मदद नहीं की। अब न्याय की उम्मीद केवल पुलिस अधीक्षक विनोद मीना से है।”

गांव में चर्चा दृ रातोंरात करोड़पति बने आरोपी
स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि जिन लोगों पर आरोप हैं, वे कुछ वर्ष पहले साधारण जीवन जीते थे, लेकिन अब महंगी गाड़ियां, संपत्तियां और आभूषणों के मालिक बन चुके हैं। ग्रामीणों का दावा है कि यह गिरोह न केवल अवैध वायदा कारोबार बल्कि जीएसटी चोरी और मनी लॉन्ड्रिंग में भी शामिल हो सकता है।

सख्त जांच की मांग
ग्रामीणों और पीड़ितों ने प्रशासन से मांग की है कि पुलिस अधीक्षक स्तर से जांच कर फर्जी वायदा कारोबार, टैक्स चोरी और बेनामी संपत्तियों का पूरा नेटवर्क उजागर किया जाए।

यह मामला सिर्फ एक व्यापारी की ठगी का नहीं, बल्कि गरीबों की कमाई, सिस्टम की चुप्पी और कानून के दुरुपयोग की गंभीर कहानी है। अब देखना यह है कि क्या मंदसौर पुलिस इस गिरोह पर नकेल कसकर पीड़ितों को न्याय दिलाएगी, या मामला फाइलों में ही दबा रह जाएगा।

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