नीमच। मध्य प्रदेश सरकार की महत्वाकांक्षी भू-आवास योजना के तहत किए गए ड्रोन सर्वे पर अब सवाल उठने लगे हैं। नीमच जिले की रामपुरा तहसील के ग्राम चचोर में ग्रामीणों ने सर्वे में भारी अनियमितताओं और भ्रष्टाचार का आरोप लगाया है। ग्रामवासियों ने जिला कलेक्टर को दिए ज्ञापन में बताया कि शासन की योजना के तहत ड्रोन सर्वे से आबादी क्षेत्र के वास्तविक निवासियों को उनके घरों का स्वामित्व पट्टा दिया जाना था, लेकिन गांव में खाली खेतों और सरकारी जमीनों पर फर्जी नामों से पट्टे बना दिए गए।
ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि इस पूरे प्रकरण में गिरदावर अनुराग पाटीदार की मुख्य भूमिका रही। उन्होंने अपने चहेतों को लाभ पहुँचाने के लिए नियमों को दरकिनार कर फर्जी पट्टे जारी करवाए, जबकि कई वास्तविक और पुराने निवासियों को सर्वे से वंचित कर दिया गया।
ग्रामवासियों ने बताया कि वे पिछले 100 वर्षों से चचोर में निवासरत हैं, फिर भी उन्हें योजना का लाभ नहीं मिला, जबकि जिन खेतों में आज भी घास-फूस और झाड़ियाँ खड़ी हैं, उन्हें आवासीय घोषित कर पट्टे दे दिए गए। ग्रामीणों ने मांग की है कि ड्रोन सर्वे की उच्च स्तरीय जांच कराई जाए, गिरदावर अनुराग पाटीदार को निलंबित किया जाए और फर्जी पट्टों को निरस्त कर वास्तविक लाभार्थियों को उनका हक दिया जाए।
ग्रामीणों ने बताया कि उन्होंने यह शिकायत पहले भी तहसील स्तर पर की थी, परंतु अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है। इस प्रकरण की प्रतिलिपि राज्यपाल, मुख्यमंत्री, आईजी उज्जैन रेंज, कलेक्टर नीमच, एसडीएम मनासा और तहसील कार्यालय रामपुरा को भी भेजी गई है।