निंबाहेड़ा। खाद्य सुरक्षा एवं औषधि नियंत्रण विभाग की लापरवाही और ढीली कार्यप्रणाली के चलते निंबाहेड़ा उपखंड क्षेत्र में कई मेडिकल स्टोर बिना पंजीकृत फार्मासिस्ट की मौजूदगी के खुलेआम संचालित हो रहे हैं।
सरकारी नियमों की अनदेखी करते हुए यह दुकानें ‘किराए के लाइसेंस’ पर चल रही हैं।
सूत्रों के अनुसार, कई फार्मासिस्ट 3 से 10 हजार रुपए प्रतिमाह में अपने नाम से लाइसेंस किराए पर दे रहे हैं। इनमें से अधिकतर फार्मासिस्ट या तो किसी अन्य संस्थान में कार्यरत हैं या शहर से बाहर रहते हैं, जबकि उनके नाम से दवाओं की बिक्री की जा रही है।
स्थिति यह है कि न केवल बाजार की दुकानें बल्कि कई निजी अस्पतालों की फार्मेसी भी इसी तरह संचालित हो रही हैं। अस्पताल प्रबंधन योग्य फार्मासिस्ट का नाम लेकर लाइसेंस तो ले लेते हैं, लेकिन मौके पर उनकी उपस्थिति नहीं होती।
ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स एक्ट, 1940 के अनुसार, हर मेडिकल स्टोर पर पंजीकृत फार्मासिस्ट की उपस्थिति अनिवार्य है। इसके बावजूद, अधिकांश जगहों पर अनुभवहीन कर्मचारी या सेल्समैन दवाएं बेच रहे हैं, जिससे मरीजों की जान जोखिम में है। स्थानीय नागरिकों ने औषधि नियंत्रण विभाग से सख्त कार्रवाई की मांग की है ताकि ऐसे फर्जी मेडिकल संचालन पर रोक लगाई जा सके।