नीमच। शहर की शालीमार कॉलोनी में खेल के पल दर्द में बदल गए, जब महज़ चार साल की नन्ही अलशिफा पर आवारा कुत्तों के झुंड ने अचानक धावा बोल दिया। मासूम की चीखों से कॉलोनी गूंज उठी, लोग दौड़े, पर तब तक बहुत देर हो चुकी थी। नन्हा चेहरा खून से लथपथ था। होठों पर टांके, आंखों के पास गहरे जख्म और भय से कांपती मासूमियत। अब यह छोटी बच्ची जिला अस्पताल के आईसीयू में ज़िंदगी से लड़ रही है, जबकि पूरे इलाके में खौफ और ग़ुस्से का माहौल है।
दरवाजे के बाहर खेलते समय हुआ हमला-
घटना बुधवार दोपहर लगभग 10 बजे की बताई जा रही है। बच्ची की मां फिरोजा ने बताया कि उनकी बेटी अलशिफा खाना खाकर आंगन में खेल रही थी। तभी अचानक तीन-चार आवारा कुत्ते वहां पहुंचे और एक कुत्ते ने बच्ची को पकड़कर बाहर खींच लिया। बाकी कुत्ते भी उस पर टूट पड़े और बुरी तरह नोच डाला। मोहल्ले के लोगों ने शोर मचाकर किसी तरह बच्ची को छुड़ाया। परिजनों ने बताया कि बच्ची का पूरा चेहरा खून से लथपथ था।
इलाके में पहले भी दो हमले हो चुके हैं-
स्थानीय निवासियों के अनुसार यह तीसरी घटना है जब शालीमार कॉलोनी में कुत्तों ने हमला किया है। इससे पहले भी एक बच्ची और एक महिला को कुत्ते काट चुके हैं। लोगों में भय का माहौल है। बच्चे अब घरों के बाहर खेलने से डरने लगे हैं।
नगर पालिका पर लापरवाही के आरोप-
कॉलोनीवासियों ने नगर पालिका पर गंभीर लापरवाही का आरोप लगाया है। उन्होंने बताया कि कई बार शिकायत करने के बावजूद कोई कार्रवाई नहीं हुई। एक निवासी ने बताया हम सुबह से फोन कर रहे हैं, लेकिन न तो नगर पालिका का अमला पहुंचा और न ही पुलिस। शहर में आवारा कुत्तों की संख्या लगातार बढ़ रही है, पर किसी को चिंता नहीं है।
नसबंदी अभियान में भी घोटाले के आरोप-
नगर पालिका ने कुछ समय पहले आवारा कुत्तों की नसबंदी अभियान चलाया था, लेकिन उस पर घोटाले के आरोप लग चुके हैं। इसके बावजूद कुत्तों की संख्या में कोई कमी नहीं आई। लोगों का कहना है कि इस भयावह हमले के बाद प्रशासन को तुरंत ठोस कदम उठाने चाहिए।
सुप्रीम कोर्ट ने दिए थे कड़े निर्देश-
सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में आदेश दिया था कि स्कूल, कॉलेज, अस्पताल और बस स्टैंड जैसे सार्वजनिक स्थानों से आवारा कुत्तों को हटाया जाए। कोर्ट ने कहा था कि इन स्थानों पर सुरक्षा बाड़ लगाई जाए, ताकि कुत्ते वहां प्रवेश न कर सकें। साथ ही, कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया था कि पकड़े गए आवारा कुत्तों को वापस उसी इलाके में नहीं छोड़ा जाएगा, बल्कि उन्हें शेल्टर होम में रखा जाएगा। कोर्ट ने कहा कि बार-बार डॉग बाइट की घटनाएं सिर्फ प्रशासनिक लापरवाही नहीं, बल्कि सिस्टम की विफलता हैं।
लोगों की मांग- कार्रवाई हो, सुरक्षा सुनिश्चित की जाए
घटना के बाद क्षेत्र में दहशत का माहौल है। लोगों ने जिला प्रशासन, नगर पालिका और पुलिस विभाग से तुरंत कार्रवाई की मांग की है। निवासियों ने कहा कि कॉलोनी और आसपास के क्षेत्रों में कुत्तों को पकड़ने के लिए विशेष अभियान चलाया जाए और रात में गश्त बढ़ाई जाए।
फिलहाल बच्ची का इलाज जारी-
चार वर्षीय अलशिफा का इलाज नीमच जिला अस्पताल के आईसीयू वार्ड में जारी है। डॉक्टरों का कहना है कि बच्ची की हालत फिलहाल स्थिर है, लेकिन चेहरे पर गंभीर चोटें हैं।