मंदसौर। न्याय उत्सव-विधिक सेवा सप्ताह (9 से 14 नवंबर 2025) के तहत जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, मंदसौर द्वारा अपना घर (बालिका गृह) में विधिक जागरूकता शिविर का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम माननीय प्रधान जिला न्यायाधीश एवं अध्यक्ष, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, अनीष कुमार मिश्रा के मार्गदर्शन में संपन्न हुआ।
शिविर में जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के सचिव एवं न्यायाधीश सुधीर सिंह निगवाल ने बालिकाओं को संबोधित करते हुए बाल अपराधों से संबंधित कानूनी प्रावधानों की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि कड़े कानून होने के बावजूद बच्चों के विरुद्ध अपराधों में वृद्धि हो रही है, इसलिए जागरूकता और सतर्कता अत्यंत आवश्यक है।
निगवाल ने बाल विवाह अधिनियम के तहत बाल विवाह को अवैध बताते हुए कहा कि यदि विवाह का कोई पक्ष 18 वर्ष से कम आयु का है, तो वह कुटुंब न्यायालय में आवेदन कर विवाह को शून्य करा सकता है। उन्होंने यह भी बताया कि बाल विवाह को प्रोत्साहित या सहयोग करना भी दंडनीय अपराध है।
इसके साथ ही उन्होंने लैंगिक अपराधों से बालकों का संरक्षण अधिनियम (POCSO Act), 2012 के महत्वपूर्ण प्रावधानों की जानकारी देते हुए कहा कि यह अधिनियम बच्चों के विरुद्ध होने वाले लैंगिक अपराधों के लिए कठोर दंड का प्रावधान करता है। निगवाल ने बालिकाओं को शिक्षा और आत्मनिर्भरता के महत्व पर बल देते हुए बेहतर भविष्य के लिए प्रेरित किया।
इस अवसर पर अपना घर की अधीक्षिका मोनिका वरुण, परामर्शदाता वंदना गौड़, एनजीओ फ्रीडम फार्म की ममता लाल, स्टाफ सदस्य एवं बालिकाएं उपस्थित रहीं।