खंडवा। सर्व किसान समाज ने शनिवार सुबह से रेल रोको आंदोलन शुरू किया। करीब 5 हजार किसान रेलवे ट्रैक पर बैठने की तैयारी कर रहे। इस बीच सांसद ज्ञानेश्वर पाटिल मौके पर पहुंचे और किसानों को मुख्यमंत्री और केंद्रीय कृषि मंत्री से बात कराने का आश्वासन देने का प्रयास किया।
सांसद ज्ञानेश्वर पाटिल किसानों से मिले और प्रदेश सरकार के कृषि मंत्री एंदलसिंह कंसाना से फोन पर बातचीत करवाई। किसानों ने मुख्यमंत्री और केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराजसिंह चौहान से बात कराने की मांग की, लेकिन सांसद पाटिल सीधे संपर्क नहीं करवा पाए। उन्होंने किसानों से दो घंटे का समय मांगा। यदि केंद्रीय मंत्री और मुख्यमंत्री से बात होगी और वे आश्वस्त करेंगे कि सात दिन में समस्याओं का निराकरण होगा, तभी किसान आंदोलन खत्म करेंगे।
किसान नेता जय पटेल और सुभाष पटेल ने कहा कि अगर दो घंटे में संतोषजनक जवाब नहीं मिला तो वे लगभग 3 बजे रेलवे ट्रैक पर जाकर बैठ जाएंगे।
टिगरिया गांव के मांगलिक भवन में सुबह 8 बजे से ही कई संगठनों के किसान नेता जुटने लगे। 70 गांवों के लगभग 5 हजार किसान के जुटने की उम्मीद है।
प्याज का निर्यात खोलें या महाराष्ट्र मॉडल पर खरीदी करें
किसानों की प्रमुख मांग है कि केंद्र सरकार प्याज का निर्यात तुरंत खोले, ताकि विदेशों में बिक्री से भाव बढ़ सकें। यदि निर्यात नहीं खुलता तो सरकार महाराष्ट्र की तर्ज पर 24 रुपए प्रति किलो की दर से खरीदी करे। अगर ये दोनों विकल्प नहीं होते, तो किसानों को प्रति एकड़ 75 हजार रुपए प्याज फसल क्षति का मुआवजा दिया जाए। खंडवा जिले में सोयाबीन फसल की राहत राशि अभी तक न मिलने की शिकायत भी शामिल है। किसान चाहते हैं कि इसका वितरण तुरंत किया जाए।
एसपी बोले- ट्रैक पर जाना प्रतिबंधित, सुरक्षा पुख्ता
किसानों के आंदोलन को लेकर खंडवा एसपी मनोज कुमार राय ने कहा कि रेलवे ट्रैक की सुरक्षा के लिए सिविल के सथ आरपीएफ-जीआरपी के स्थानीय और बाहर से बल बुलाए गए है। रेलवे ट्रैक एरिया में किसानों के प्रवेश को प्रतिबंधित किया गया। किसान संगठनों का इस बात से अवगत करा दिया गया हैं। सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए है।
प्याज के खराब भाव से किसान परेशान, खेतों में चलाए रोटावेटर
मंडी में किसानों को 4 रूपए किलो में भी खरीदार नहीं मिल रहे। यही नहीं अच्छी किस्म का प्याज भी 8 रूपए किलो में बिक रहा है। किसानों की लागत भी नहीं निकल पा रही। ऐसे में किसान अपनी प्याज को कल्टीवेटर चलाकर खेतों में ही नष्ट कर रहे हैं, जबकि कई किसान खेतों में लगी प्याज को भेड़, बकरियों को खिलाने को मजबूर हैं।
इस साल बारिश के दौरान खंडवा, छैगांवमाखन, पंधाना और आसपास क्षेत्रों में 10 हजार हेक्टेयर में प्याज की खेती हुई थी। लगभग 8 हजार किसानों की फसलें बारिश के कारण रोगग्रस्त हो गईं, जिससे भारी नुकसान हुआ।