रामपुरा। शासकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय रामपुरा में भगवान बिरसा मुंडा की 150वीं जयंती के अवसर पर 7 से 15 नवंबर तक विविध कार्यक्रमों का भव्य आयोजन किया गया। कार्यक्रमों की श्रृंखला का शुभारंभ महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. बलराम सोनी की अध्यक्षता में हुआ।
7 से 12 नवंबर तक सांस्कृतिक एवं शैक्षणिक गतिविधियाँ-
8 नवंबर को जनजातीय विरासत एवं महान नायकों के जीवन चरित्र विषयक नाटक का मंचन डॉ. सुरेश कुमार के निर्देशन में हुआ।
9 नवंबर को जनजातीय कला पर रंगोली एवं मेंहदी प्रतियोगिता आयोजित हुई, जिसकी संयोजक डॉ. सुषमा सोलंकी थीं।
8 व 10 नवंबर को व्यक्तिगत एवं सामूहिक खेल प्रतियोगिताएँ हुईं, जिनका संचालन डॉ. शिल्पा राठौर एवं टीम ने किया।
11 नवंबर को जनजातीय इतिहास एवं स्वतंत्रता संग्राम में योगदान विषय पर क्विज का आयोजन हुआ।
12 नवंबर को बिरसा मुंडा, टंट्या मामा, रानी दुर्गावती, माता सबरी, शंकर शाह एवं रघु शाह पर आधारित निबंध एवं भाषण प्रतियोगिता रखी गई।
इसी दिन जनजातीय संस्कृति एवं प्रकृति विषय पर चित्रकला प्रतियोगिता भी आयोजित हुई।
जनजागरूकता हेतु रैलियाँ-
13 नवंबर को प्रभारी प्राचार्य जेड.एच. बोहरा के नेतृत्व में महाविद्यालय से शहीद पार्क तक पैदल रैली निकाली गई। मार्ग में स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों के स्मारकों पर श्रद्धांजलि दी गई।
14 नवंबर को भी महाविद्यालय परिवार द्वारा पैदल रैली निकाली गई, जिसमें विद्यार्थियों ने आदिवासी धार्मिक स्थलों पर पूजा-अर्चना की।
समापन समारोह-
15 नवंबर को भगवान बिरसा मुंडा की जयंती हर्षाेल्लास से मनाई गई। इस अवसर पर संबोधित करते हुए प्रभारी प्राचार्य जेड.एच. बोहरा ने कहा कि बिरसा मुंडा ने अल्पायु में ही अंग्रेजों के शोषण के विरुद्ध जल-जंगल-जमीन की रक्षा के लिए महान संघर्ष किया। उनकी वीरगाथा राष्ट्र की अमूल्य धरोहर है। कार्यक्रम प्रभारी प्रो. शिवकोर कवचे ने भी विद्यार्थियों को बिरसा मुंडा के स्वतंत्रता संग्राम में योगदान से परिचित कराया। कार्यक्रमों में महाविद्यालय के सभी विद्यार्थी, प्राध्यापक एवं स्टाफ बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।