मनासा। उपज मंडी में उपज लेकर आने वाले किसानों को अच्छी क्वालिटी का भोजन मिले इसको लेकर मुख्यमंत्री अन्नपूर्णा योजना शुरू की। लेकिन मनासा मंडी में किसानों को अखबार की रद्दी में भोजन दिया जा रहा है। इसकी शिकायत मिलने पर एसडीएम ने मंडी सचिव को कार्रवाई के निर्देश दिए। जिस पर मंडी सचिव ने केंटीन का निरीक्षण किया तो वहां पर अखबार की रद्दी में पुडियां मिली। जिस पर मंडी सचिव ने टेंडरकर्ता को फटकार लगाते हुए किसानों को पत्तल में खाना देने की बात कहीं।
नगर की कृषि उपज मंडी में किसानों को योजना के तहत भोजन देने का टेंडर राजेश मालपानी के नाम हुआ। लेकिन इसे व्यापारी संघ मनभावन बालाजी के नाम से संचालित कर रहे है। ष्शासन के नियमानुसार किसानों को 5 रूपए में भोजन देना है। लेकिन यहां पर किसानों से 10 रूपए लिए जा रहे है। कई बार 5 रूपए अधिक लेने पर किसानों ने भी आपत्ति ली लेकिन व्यापारी संघ का कहना है कि हम मंडी से एक रूपया भी नही ले रहे है। टेंडर के मुताबिक किसानो को थाली कटोरी में भोजन देना है। इसके बाद भी यहां पर अन्नदाताओं को अखबार में भोजन दिया जा रहा है। इसकी शिकायत भाजपा कुशाभाऊ ठाकरे भाजपा मंडल प्रवक्ता दिनेश राठौर ने एसडीएम किरण आंजना से लिखित में कर व्यवस्था सुधारने की मांग की। शिकायत मिलने पर एसडीएम ने मंडी सचिव कमलेश मीणा को व्यवस्था सुधारने के निर्देश दिए। इसके बाद मंडी सचिव कमलेश मीणा ने कर्मचारीयों के साथ में केंटीन का निरीक्षण किया तो वहां पर अखबार में लपेटकर पुडिया किसानो को दी जा रही थी। जिसको देखकर मंडी सचिव मीणा ने केंटीन संचालित करने वाले व्यापारी को फटकार लगाई। वही व्यापारी संघ के सदस्यों को गुरूवार से किसानों को पत्तल दोने में भोजन देने की बात कहीं। मंडी सचिव ने कहा कि भोजन की क्वालीटी में भी सुधार करे। शिकायतकर्ता दिनेश राठौर ने बताया कि किसानों को जिस अखबार की रद्दी में पुडिया दी जा रही है वो केमिकल युक्त है। अखबार में पुडी लपटने से अखबार का केमिकल पुडी पर लग रहा है। जो स्वास्थ्य को नुकसान पहुंचाता है। किसानो के स्वास्थ्य की चिंता प्रशासन और केटीन संचालित करने वाले को नही है। कई बार इस मामले में मंडी प्रशासन को शिकायत भी की गइ इसके बाद भी कोई कार्रवाई नही की गई।
बता दे कि मंडी में जो उपज किसानों की जमीन पर बिखर जाती है वो सोरण मन भावन बालाजी के नाम पर जाता है। इसका संचालन मंडी व्यापारी संघ कर रहा है। और वह राशि किसानों के लिए बनने वाले भोजन पर खर्च की जा रही है। इसलिए मंडी से मिलने वाली राशि केंटीन संचालक नही लेता है। जबकि नियम यह है कि 5 रूपए किसान देगा और 15 रूपए मंडी देगी। राठौर की शिकायत और मंडी सचिप की फटकार के बाद भी अब मंडी में किसानों को अखबार की रद्दी में भोजन नही मिलेगा। इस मामले में मंडी सचिव मीणा ने बताया कि किसानों को अखबार में भोजन दिया जा रहा था। जिसकी शिकायत मिलने पर निरीक्षण कर अखबार में भोजन नही देने के निर्देश दिए है। और नई व्यवस्था कर पत्तल दोने में ही भोजन देने के निर्देश दिए है।
मंडी में किसानों को केंटिन संचालक द्वारा अखबार में भोजन देने सबंधी शिकायत मिली थी। जिस पर मंडी सचिव को व्यवस्था सुधारने के निर्देश दिए। मंडी सचिव ने इस मामले में पहुंचकर अखबार में भोजन नही देने के निर्देश दिए है।