मंदसौर। जिले के जिला एवं तहसील न्यायालयों में शनिवार को नेशनल लोक अदालत का आयोजन किया गया। इसमें मंदसौर, गरोठ, भानपुरा, नारायणगढ़ एवं सीतामऊ के न्यायालय सम्मिलित रहे। लोक अदालत का उद्देश्य लंबित प्रकरणों का त्वरित, सुलभ एवं सौहार्दपूर्ण निराकरण करना रहा।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए जिला न्यायाधीश श्री अनीष कुमार मिश्रा, सेवानिवृत्त न्यायाधीश श्री जी.डी. सक्सेना एवं श्री रघुवीर सिंह चुण्डावत ने लोक अदालत के महत्व, आपसी समझौते के लाभ तथा शीघ्र न्याय की आवश्यकता पर प्रकाश डाला। कार्यक्रम का संचालन श्री सुधीर सिंह निगवाल ने किया।
इस अवसर पर जिले के विभिन्न न्यायालयों के न्यायाधीशगण, अधिवक्ता, पुलिस एवं प्रशासनिक अधिकारी, बैंक व बीमा कंपनियों के प्रतिनिधि, लीगल एड काउंसल तथा पैरालीगल वॉलंटियर्स उपस्थित रहे।
22 खण्डपीठों में 814 प्रकरणों का निपटारा
नेशनल लोक अदालत के अंतर्गत जिले में कुल 22 न्यायिक खण्डपीठों का गठन किया गया। न्यायालयों में लंबित 1798 प्रकरणों में से 814 प्रकरणों का निराकरण किया गया, जिनमें 6.21 करोड़ से अधिक के अवार्ड पारित हुए। इसके अतिरिक्त 2084 प्री-लिटिगेशन प्रकरणों में से 1197 प्रकरणों का निपटारा करते हुए ₹44.61 लाख की वसूली की गई।
प्रमुख प्रकरणों में महत्वपूर्ण अवार्ड-
लोक अदालत में मोटर दुर्घटना के 25 प्रकरणों में 1.67 करोड़ तथा चेक अनादरण (चेक बाउंस) के 262 प्रकरणों में 4.07 करोड़ के अवार्ड पारित किए गए।
मानवीय दृष्टिकोण से भी मिली सफलता-
नेशनल लोक अदालत में कुछ संवेदनशील एवं मानवीय प्रकरणों का भी समाधान हुआ। लगभग ढाई वर्षों से अलग रह रहे पति-पत्नी दिनेश एवं रानी (परिवर्तित नाम) को अधिवक्ताओं एवं न्यायालय के प्रयासों से पुनः साथ लाया गया। वहीं, मारपीट एवं प्रताड़ना से संबंधित एक अन्य प्रकरण में नरगीश एवं आशीक (परिवर्तित नाम) आपसी समझौते पर सहमत हुए और शांतिपूर्ण जीवन जीने का संकल्प लिया।
नेशनल लोक अदालत के इस आयोजन से न केवल पक्षकारों को शीघ्र न्याय मिला, बल्कि न्यायालयों का बहुमूल्य समय भी बचा।