गरोठ। ग्राम देथली बुजुर्ग के बीच के मजरे निवासी उदा पिता किशन राठौड़ (बंजारा) का पुत्र राधेश्याम राठौड़, जो पिछले आठ वर्षों से गुमशुदा था, रविवार को साधु के वेश में अपने पैतृक गांव लौट आया। बेटे को वर्षों बाद सकुशल देख माता-पिता और परिजनों की खुशी का ठिकाना नहीं रहा।
प्राप्त जानकारी के अनुसार राधेश्याम राठौड़ कंबल आदि बेचने का कार्य करता था। करीब आठ वर्ष पूर्व मुंबई से गोवा की यात्रा के दौरान रात्रिकालीन ट्रेन से गिर जाने अथवा किसी अनहोनी की आशंका के चलते वह लापता हो गया था। इस संबंध में परिजनों द्वारा संबंधित थाने और जीआरपी में भी सूचना दी गई थी, लेकिन उसका कोई सुराग नहीं मिल पाया।
बताया गया कि हाल ही में राधेश्याम साधु-संतों के साथ ग्राम जती पिपलिया के समीप स्थित बिलखेड़ी गांव में रुका हुआ था। वहीं उसकी पहचान उसकी मौसी से हुई। सूचना मिलने पर माता-पिता और गांव के लोग वहां पहुंचे, जहां राधेश्याम ने सभी को पहचान लिया और नाम भी बताए।
रविवार को राधेश्याम अपने पैतृक गांव देथली बुजुर्ग पहुंचा, जहां बंजारा समाज के लोगों एवं परिजनों ने पुष्पवर्षा कर उसका भव्य स्वागत किया। इस अवसर पर गांव के पूर्व सरपंच पीरूलाल गोड, वर्तमान सरपंच मुकेश गोड सहित समाज के पुरुष और महिलाएं उपस्थित रहे।
आठ वर्षों बाद बेटे की वापसी से माता-पिता, भाई-बहनों और ग्रामीणों में खुशी का माहौल है। बताया गया कि राधेश्याम फिलहाल दो दिन गांव में ठहरेगा, इसके बाद वह पुनः अपने साथ आए साधु-संतों के साथ प्रस्थान करेगा।