खनियांधाना। धर्मनगरी खनियांधाना के इतिहास में आज का दिन स्वर्ण अक्षरों में दर्ज हो गया। समाधि सम्राट आचार्य श्री 108 विद्यासागर जी महामुनिराज द्वारा प्रदत्त आशीर्वाद के अनुपालन में, उनके परम प्रभावक शिष्य निर्यापक श्रमण मुनि पुंगव श्री 108 सुधासागर जी महामुनिराज ससंघ का नगर की पावन धरा पर भव्य मंगल प्रवेश हुआ।
आज सुबह जब खनियांधाना 7 डिग्री तापमान की हाड़ कंपा देने वाली ठंड और कोहरे की चादर में लिपटा था, तब श्रद्धालुओं का उत्साह चरम पर नजर आया। सुबह 8 बजे करवाया रोड स्थित पुट्ठा फैक्ट्री से मुनि संघ का विहार प्रारंभ हुआ। पनिहारा चौराहे पर मुनि श्री सुधासागर जी महाराज ससंघ और मुनि श्री निरापद सागर जी महाराज का श्मंगल मिलनश् हुआ, जो अत्यंत अद्भुत और भावुक कर देने वाला दृश्य था।
नगर प्रवेश के दौरान भक्ति की ऐसी अविरल धारा बही कि हर कोई गुरुवर के स्वागत के लिए लालायित दिखा। मार्ग में जगह-जगह श्रद्धालुओं ने अत्यंत श्रद्धा भाव से मुनि श्री के पाद प्रक्षालन किए और आरती उतारकर मंगल आशीर्वाद प्राप्त किया। क्षेत्रीय विधायक प्रीतम सिंह लोधी ने भी मुनि संघ की अगवानी की और पैदल विहार कर धर्म लाभ लिया। मुनि श्री के सम्मान में सर्व समाज के व्यापारियों ने अपनी दुकानें स्वेच्छा से बंद रखीं और जेसीबी (जेसीबी) मशीनों से गुरुवर पर निरंतर पुष्प वर्षा की गई।
नगर विहार करते हुए मुनि संघ ने सभी प्रमुख जिनालयों के दर्शन किए, जिसके पश्चात श्री 1008 पार्श्वनाथ दिगंबर जैन बड़ा मंदिर में मुनि श्री की भव्य धर्मसभा हुई। अपने ओजस्वी प्रवचनों में मुनि श्री ने धर्म की रक्षा और संस्कारों के महत्व पर प्रकाश डाला, जिसका लाभ हजारों की संख्या में उपस्थित जनसमूह ने लिया। इसी के साथ नगर में आगामी 11 फरवरी से 16 फरवरी 2026 तक आयोजित होने वाले भव्य श्पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महामहोत्सवश् का भी शंखनाद हुआ, जो मुनि श्री सुधासागर जी और मुनि श्री निरापद सागर जी के मंगल सानिध्य में संपन्न होगा।