दतिया। मध्य प्रदेश के दतिया के भांडेर तहसील में सीमांकन, नामांतरण और बंटवारे के मामलों को लेकर तहसीलदार पर खुलेआम पैसे मांगने के गंभीर आरोप सामने आए हैं। ब्लॉक कांग्रेस कमेटी के वरिष्ठ नेता व पूर्व पार्षद जगदीश पाराशर ने इस संबंध में एसडीएम कार्यालय पहुंचकर एसडीएम सोनाली राजपूत को ज्ञापन सौंपा।
ज्ञापन में आरोप लगाया गया है कि तहसीलदार सुनील भदौरिया द्वारा काम के बदले मोटी रकम मांगी जाती है। पैसे न देने पर फाइलें जानबूझकर अटका दी जाती हैं। शिकायतकर्ता के अनुसार भांडेर और आसपास के गांवों में 50 से 60 से अधिक सीमांकन (नाप) के मामले जानबूझकर रोके गए हैं। सीमांकन के बदले मोटी राशि की मांग की जाती है और राशि नहीं मिलने पर पटवारी एवं राजस्व निरीक्षक (आरआई) को जमीन नापने से रोक दिया जाता है।
कांग्रेस नेता ने आरोप लगाया कि इसी कारण क्षेत्र में जमीन विवाद बढ़ते जा रहे हैं और अवैध कब्जों को लेकर हालात लगातार बिगड़ रहे हैं। कई मामलों में दो-दो साल से नामांतरण, फौती नामांतरण और बंटवारे के प्रकरण लंबित पड़े हैं। आरोप है कि जब तक लेन-देन तय नहीं हो जाता, तब तक फाइल दर्ज तक नहीं की जाती। ऐसा इसलिए किया जाता है ताकि समय-सीमा की बाध्यता न आए और सौदा तय होने के बाद ही कार्रवाई आगे बढ़ाई जाए।
ज्ञापन में यह भी आरोप लगाया गया कि फरियादियों से बातचीत के दौरान अभद्र भाषा का इस्तेमाल किया जाता है और साफ शब्दों में कहा जाता है कि, “रुपए आए बिना काम नहीं होगा।” इसके साथ ही क्षेत्र में अवैध अतिक्रमण से जुड़ी शिकायतों का भी लेन-देन के आधार पर निपटारा किए जाने का गंभीर आरोप लगाया गया है।
तहसीलदार ने आरोपों को बताया निराधार
इन गंभीर आरोपों पर जब तहसीलदार सुनील भदौरिया से बात की गई, तो उन्होंने सभी आरोपों को पूरी तरह निराधार बताया। तहसीलदार का कहना है कि उनके विरुद्ध लगाए गए आरोप तथ्यहीन हैं और नियमानुसार ही कार्य किया जा रहा है।
फिलहाल मामले को लेकर प्रशासनिक हलकों में चर्चा तेज है। एसडीएम को सौंपे गए ज्ञापन के बाद अब इस पूरे प्रकरण में आगे की कार्रवाई पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं।