चित्तौड़गढ़। प्रजापिता ब्रह्मा कुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय के प्रताप नगर सेवा केंद्र पर आयोजित आध्यात्मिक कक्षा में राजयोगिनी आशा दीदी ने ‘दान की ईश्वरीय विधि’ विषय पर गहन विचार व्यक्त किए।
उन्होंने कहा कि दान अर्थात् देना- यही सृष्टि का मूल नियम है। सम्पूर्ण सृष्टि देने की भावना पर आधारित है। यदि प्रकृति का नियम लेने का हो जाए तो सृष्टि का अस्तित्व ही समाप्त हो जाएगा।
आशा दीदी जी ने समझाया कि परमात्मा पिता ज्ञान, गुण और शक्तियों के सागर हैं, किंतु जब वे इन दिव्य शक्तियों का दान विश्व को देते हैं तभी वे प्रभु, पालनहार और भगवान के नाम से जाने जाते हैं। उन्होंने कहा कि देने का अर्थ है सफल करना। जिस प्रकार किसान एक बीज बोकर अनेक दानों की प्राप्ति करता है, उसी प्रकार सही भावना और समझ से किया गया दान अनेक गुना फल देता है।
उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि बिना सोचे-समझे किया गया दान कई बार बुराई के खाते में भी जमा हो सकता है। इसलिए समय की मांग है कि हम परमात्मा द्वारा सिखाई गई सर्वश्रेष्ठ और अनोखी दान विधि को अपनाएं, जिससे जीवन पुण्यशील और आत्मा सौभाग्यशाली बन सके।
उन्होंने कहा कि “दे दान तो छूटे ग्रहण” - आज मानव जीवन पर ईर्ष्या, द्वेष और नफरत का ग्रहण लगा हुआ है। इस ग्रहण को हटाने के लिए प्रत्येक व्यक्ति को अपनी किसी एक कमजोरी का दान अवश्य करना चाहिए। जब हम अपनी कमजोरियों का त्याग करते हैं, तभी जीवन खुशियों से भर जाता है।
कार्यक्रम के अंत में उपस्थित सभी भाई-बहनों ने अपनी-अपनी एक कमजोरी को दान करने का संकल्प लेते हुए हाथ उठाकर प्रतिज्ञा की। वातावरण आध्यात्मिक ऊर्जा और सकारात्मक संकल्पों से ओत-प्रोत हो गया।