नीमच। दाऊदी बोहरा समुदाय द्वारा पूरी दुनिया में रमज़ान की 23वीं रात को शबे क़द्र (लैलतुल क़द्र) बड़े एहतराम और अकीदत के साथ मनाई जाएगी। इसी क्रम में नीमच का बोहरा समुदाय भी आज रात इस मुक़द्दस और बरकतों भरी रात की इबादत के लिए पूरी रात जागकर इबादत करेगा।

इस्लामी मान्यताओं के अनुसार शबे क़द्र को “तक़दीर की रात” कहा जाता है। यह वह मुबारक रात मानी जाती है जिसमें अल्लाह तआला अपने बंदों की दुआओं को कबूल फरमाता है और रहमतों व बरकतों की बारिश होती है। इस रात की फज़ीलत हजार महीनों की इबादत से भी ज्यादा बताई गई है।

दाऊदी बोहरा रिवायतों के अनुसार यह रात हज़रत पैग़म्बर मोहम्मद (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) की साहिबज़ादी हज़रत सैयदा फातिमा ज़हरा (अलैहस्सलाम) से भी मंसूब मानी जाती है, जिनकी याद और अकीदत के साथ यह रात खास तौर पर मनाई जाती है। समुदाय के लोग इस रात कुरआन की तिलावत, नफ़्ल नमाज़, ज़िक्र और दुआ में मशगूल रहते हैं।

नीमच में बोहरा कॉलोनी, बोहरा बाज़ार और शहर की मस्जिदों को इस मौके पर खास तौर पर सजाया गया है। समुदाय के लोग पूरे इख़लास और खलूस के साथ इस मुबारक रात की तैयारी कर रहे हैं। घरों में भी इबादत और दुआओं का खास एहतमाम किया जाता है। अमाकीने मोहम्मदिया बोहरा कॉलोनी की मस्जिद में शेख हुजैफा भाई होशंगाबाद वाला और बोहरा बाजार की मस्जिद में मुल्ला ताहिर भाई द्वारा नमाज अदा कराई जाएगी।

दाऊदी बोहरा समाज में इस रात एक खास रिवाज़ भी निभाया जाता है, जिसके तहत लोग सूखे मेवे, मिठाइयाँ और चॉकलेट खरीदकर बच्चों तथा ज़रूरतमंद लोगों में तकसीम करते हैं, ताकि इस मुबारक रात की खुशियाँ सबके साथ बांटी जा सके। इसके साथ ही समाजजन आपस में एक-दूसरे से दुआओं की दरख़्वास्त करते हैं और अगर किसी से जाने-अनजाने में कोई गुनाह या ख़ता हुई हो तो उससे माफी भी तलब करते हैं, ताकि इस मुक़द्दस रात को दिलों की सफाई और भाईचारे के साथ मनाया जा सके।

आज के दौर में जब दुनिया के कई हिस्सों में जंग, बेअम्नी और अशांति का माहौल है, ऐसे समय में दाऊदी बोहरा समुदाय के लोग ख़ास कर माह-ए-रमज़ान में इंसानियत, अमन और भाईचारे की दुआएँ कर रहे हैं। समुदाय के सदस्यों ने बताया कि इस बरकतों भरी रात में खास तौर पर दुनिया भर में अमन, इंसाफ और समझदारी कायम होने के लिए दुआ की जाएगी।
