सोनकच्छ। हिन्दू पंचांग के अनुसार होली के सातवें दिन मनाई जाने वाली शीतला सप्तमी के अवसर पर मंगलवार को नगर भौरासा में श्रद्धा और आस्था के साथ माता शीतला की पूजा-अर्चना की गई। इस दिन परंपरा के अनुसार घरों में चूल्हा नहीं जलाया जाता और एक दिन पहले बने ठंडे भोजन का भोग माता को अर्पित किया जाता है।
मंगलवार तड़के करीब रात्रि 3 बजे से ही महिलाओं का मंदिरों में पहुंचना शुरू हो गया, जो सुबह तक जारी रहा। महिलाओं ने माता शीतला के दर्शन कर परिवार की सुख-समृद्धि, स्वास्थ्य और निरोगी जीवन की कामना की।
मान्यता के अनुसार माता शीतला को बासी या ठंडे भोजन का ही भोग लगाया जाता है। पूजा के दौरान मीठा भात (ओलिया), खाजा, चूरमा, मगद, नमकपारे, शक्करपारे, बेसन चक्की, पुए, पकौड़ी, राबड़ी, बाजरे की रोटी, पूड़ी और सब्जी आदि का प्रसाद अर्पित किया गया। पूजा के बाद शीतला माता की चालीसा पढ़ी गई और कथा भी सुनी गई।
पंडित मनोज जोशी के अनुसार शीतला माता का पूजन करने से शरीर रोगमुक्त रहने का आशीर्वाद मिलता है। ऐसी मान्यता है कि माता की कृपा से चेचक जैसे रोगों से भी मुक्ति मिलती है।
शीतला माता मंदिर के पुजारी अनिल कुंभकार ने बताया कि नगर के माली मोहल्ला स्थित शीतला माता मंदिर, थाना परिसर के पास लोधी मोहल्ला मंदिर, पटेल के ओटले पर स्थित मंदिर तथा देव धर्म गली स्थित मंदिर में रात से ही महिलाएं पूजा करने पहुंचीं और माता का आशीर्वाद प्राप्त किया।
इस दौरान कई महिलाओं ने व्रत रखकर विधि-विधान से माता की पूजा की और परिवार की खुशहाली की कामना की।