भोपाल/उज्जैन। राज्यपाल मंगुभाई पटेल की अध्यक्षता में आयोजित सम्राट विक्रमादित्य विश्वविद्यालय, उज्जैन के 30वें दीक्षांत समारोह को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि ज्ञान, विज्ञान और ध्यान के वैश्विक केंद्र उज्जैन को भगवान श्रीकृष्ण ने अपनी शिक्षास्थली के रूप में चुना था। चौसठ कलाओं और 14 विद्याओं की यह पावन धरती सम्राट विक्रमादित्य की कर्मभूमि रही है, जो शौर्य, सुशासन और न्यायप्रियता के प्रतीक थे।
मुख्यमंत्री ने कहा कि विश्वविद्यालय का 30वां दीक्षांत समारोह केवल उपाधि वितरण का अवसर नहीं, बल्कि सात दशकों की उस साधना का परिणाम है, जिसने देश-दुनिया को कुशल मानव संसाधन और श्रेष्ठ विद्वान दिए हैं। उन्होंने कहा कि सम्राट विक्रमादित्य का नाम विश्वविद्यालय से जुड़ना विद्यार्थियों के लिए गर्व का विषय है।
समारोह में मुख्यमंत्री ने उपाधि प्राप्त कर रहे 397 विद्यार्थियों को शुभकामनाएं देते हुए बताया कि इस अवसर पर 181 विद्यार्थियों को डिग्री, 198 को गोल्ड मेडल, एक शोधार्थी को डी-लिट और 88 शोधार्थियों को पीएचडी की उपाधि प्रदान की जा रही है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि दीक्षांत समारोह शिक्षा का अंत नहीं, बल्कि जीवन में सीखने की नई शुरुआत है। विद्यार्थियों को जीवनभर सीखने की ललक बनाए रखनी चाहिए और समाज, परिवार व देश के विकास में योगदान देना चाहिए।
उन्होंने कहा कि यह विश्वविद्यालय प्रसिद्ध कवि शिवमंगल सिंह सुमन और पद्मश्री विष्णु श्रीधर वाकणकर जैसी महान विभूतियों की कर्मस्थली रहा है। नवाचार के क्षेत्र में अग्रणी इस विश्वविद्यालय ने कृषि अध्ययन और डेयरी टेक्नोलॉजी जैसे आधुनिक विषयों की शुरुआत में भी अग्रणी भूमिका निभाई है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने विश्वविद्यालय के विकास के लिए 51 लाख रुपये, पांच ड्रोन और अध्ययन यात्रा के लिए एक बस देने की घोषणा की।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में मध्यप्रदेश निरंतर विकास के मार्ग पर आगे बढ़ रहा है। वर्ष 2026 को किसान कल्याण वर्ष के रूप में मनाया जा रहा है और वर्ष 2028 में उज्जैन भव्य सिंहस्थ का साक्षी बनेगा। श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए सरकार अभी से व्यापक तैयारियां कर रही है, जिसमें स्वच्छता, डिजिटल मार्गदर्शन और सुगम आवागमन पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। अंत में मुख्यमंत्री ने सभी को नवरात्रि और गुड़ी पड़वा की शुभकामनाएं दीं।