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March 19, 2026, 10:55 am
KHABAR : महाकाल मंदिर शिखर पर फहराएगा ब्रह्मध्वज, 2000 साल पुरानी विक्रमकालीन परंपरा का होगा पुनरुद्धार, सूर्याेपासना और विशेष पूजन से होगी शुरुआत, पढे़ खबर

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उज्जैन। उज्जैन के विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर में चैत्र शुक्ल प्रतिपदा (गुड़ी पड़वा) 19 मार्च को मंदिर के शिखर पर ब्रह्मध्वज का भव्य ध्वजारोहण किया जाएगा। लगातार दूसरे वर्ष होने जा रहा यह आयोजन केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि सम्राट विक्रमादित्य के काल की लगभग 2000 साल पुरानी गौरवशाली परंपरा का पुनरुद्धार माना जा रहा है। इस परंपरा को पुनर्जीवित करने की पहल मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में की गई है, जिसके तहत विक्रम संवत और ध्वज परंपरा को फिर से व्यापक स्वरूप दिया जा रहा है। यह परंपरा भारतीय संस्कृति की श्रेष्ठता और प्राचीन गौरव का प्रतीक मानी जाती है।


विक्रमादित्य शोधपीठ के निदेशक राम तिवारी ने जानकारी देते हुए बताया कि ब्रह्मध्वज शक्ति, साहस और चतुर्दिक विजय का प्रतीक है। केसरिया रंग के इस विशेष ध्वज की संरचना भी अनूठी है। इसमें दोनों छोर पर दो पताकाएं होती हैं और मध्य भाग में सूर्य का अंकन किया जाता है, जो तेज, ऊर्जा और संपूर्ण विश्व पर विजय का प्रतीक है।


धार्मिक मान्यता के अनुसार, सूर्य को सृष्टि और जीवन का आधार माना गया है। इसलिए इस ध्वज का सीधा संबंध सूर्याेपासना से भी जुड़ा हुआ है। ध्वजारोहण से पूर्व विशेष पूजन-अर्चन और सूर्य आराधना की जाएगी, जिसके साथ इस परंपरा की शुरुआत होगी। इतिहास से जुड़े संदर्भों के अनुसार, ब्रह्मध्वज की परंपरा महाकाल मंदिर में प्राचीन समय से चली आ रही है।


बताया जाता है कि वर्षों पहले मंदिर के शिखर पर स्थापित ध्वज उड़कर प्रख्यात विद्वान पंडित सूर्य नारायण व्यास के निवास ‘भारती भवन’ में आकर गिरा था, जो इस परंपरा की ऐतिहासिकता को दर्शाता है। अब एक बार फिर इस परंपरा को जीवंत करते हुए महाकाल मंदिर से इसकी शुरुआत की जा रही है। आने वाले समय में इसे उज्जैन के अन्य प्रमुख मंदिरों और प्रदेशभर में भी विस्तार देने की योजना है, जिससे सनातन परंपरा और सांस्कृतिक विरासत को नई पीढ़ी तक पहुंचाया जा सके।

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