BREAKING NEWS
KHABAR : सांदीपनी विद्यालय मनासा में छात्र संवाद.. <<     KHABAR : खातेगांव थाना प्रभारी स्व. दिलीप कुमार.. <<     SHOK SAMACHAR : नहीं रही कुसुम बाई सोनी, परिवार में शोक.. <<     GOLD & SILVER RATE : यहां क्लिक करेंगे तो जानेंगे प्रदेश.. <<     HOROSCOPE TODAY : मकर और मीन राशि वालों के लिए शुभ रहेगा.. <<     NMH MANDI : एक क्लिक में पढ़े कृषि उपज मंडी नीमच के.. <<     BIG NEWS : त्योहारों में मिठाई खरीदने से पहले हो.. <<     NEWS : पंचायत समिति सदस्य चुनाव, जिले की छह.. <<     BIG REPORT : पुलिस चौकी के सामने चेकिंग में व्यस्त.. <<     KHABAR : स्वास्थ्य विभाग के कामकाज का होगा पूरा.. <<     BIG NEWS : शतरंज की चालों से निखर रही विद्यार्थियों.. <<     KHABAR : मनासा में ट्रैक्टर ने कार को मारी जोरदार.. <<     MANDI BHAV : एक क्लिक में पढ़े कृषि उपज मंडी मनासा के.. <<     BIG NEWS : नीमच के व्यस्त चौराहे पर थम गई रफ्तार,.. <<     KHABAR : बुन्देली गायक सुनील लोधी की आंखों का इलाज.. <<    
वॉइस ऑफ़ एमपी न्यूज़ चैनल में विज्ञापन के लिए..
March 27, 2026, 12:19 pm
BIG NEWS : अंतरराष्ट्रीय रिसर्च का केंद्र बन रहा मंदसौर, न्यूजीलैंड-नीदरलैंड के वैज्ञानिकों ने किया खेतों का निरीक्षण, किसानों से सीधा संवाद, अफीम के बाद अब इस फसल पर हो रहा अध्ययन, पढ़े पीडी बैरागी की खबर 

Share On:-

मंदसौर। अफीम सहित विभिन्न फसलों के लिए देश-विदेश में प्रसिद्ध मंदसौर जिले में अब इसबगोल की खेती भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आकर्षण का केंद्र बनती जा रही है। इसी क्रम में न्यूजीलैंड और नीदरलैंड के वैज्ञानिकों का दल जिले के दौरे पर पहुंचा, जहां उन्होंने इसबगोल की खेती, उत्पादन प्रक्रिया और गुणवत्ता का अध्ययन किया।

वैज्ञानिकों ने तपोवन उपवन क्षेत्र सहित आसपास के खेतों का निरीक्षण कर किसानों से सीधा संवाद किया। उन्होंने जाना कि किस प्रकार यहां इसबगोल की खेती की जाती है, उत्पादन बढ़ाने के तरीके क्या हैं और निर्यात की संभावनाएं कैसे विकसित हो सकती हैं।

नीदरलैंड के एक प्रतिष्ठित विश्वविद्यालय से जुड़े वैज्ञानिकों ने बताया कि यूरोप में इसबगोल का उपयोग स्वास्थ्य के दृष्टिकोण से व्यापक रूप से किया जाता है। ऐसे में वे भारत में इसकी उत्पादन प्रक्रिया, गुणवत्ता सुधार और सुरक्षा मानकों को समझने के लिए अध्ययन कर रहे हैं।

स्थानीय सहयोगी अरविंद पाटीदार ने बताया कि वैज्ञानिकों का उद्देश्य खेती से लेकर बाजार व्यवस्था, प्रोसेसिंग और निर्यात प्रणाली को समझना है, ताकि भविष्य में गुणवत्ता सुधार और नए अवसर विकसित किए जा सकें।

विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के अंतरराष्ट्रीय अध्ययन से किसानों को नई तकनीक, बेहतर उत्पादन और वैश्विक बाजार तक पहुंच बनाने में मदद मिलेगी। मंदसौर में इसबगोल की बढ़ती लोकप्रियता से यह क्षेत्र धीरे-धीरे अंतरराष्ट्रीय कृषि अनुसंधान का केंद्र बनता जा रहा है।

VOICE OF MP
एडिटर की चुनी हुई ख़बरें आपके लिए
SUBSCRIBE