मंदसौर। अफीम सहित विभिन्न फसलों के लिए देश-विदेश में प्रसिद्ध मंदसौर जिले में अब इसबगोल की खेती भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आकर्षण का केंद्र बनती जा रही है। इसी क्रम में न्यूजीलैंड और नीदरलैंड के वैज्ञानिकों का दल जिले के दौरे पर पहुंचा, जहां उन्होंने इसबगोल की खेती, उत्पादन प्रक्रिया और गुणवत्ता का अध्ययन किया।

वैज्ञानिकों ने तपोवन उपवन क्षेत्र सहित आसपास के खेतों का निरीक्षण कर किसानों से सीधा संवाद किया। उन्होंने जाना कि किस प्रकार यहां इसबगोल की खेती की जाती है, उत्पादन बढ़ाने के तरीके क्या हैं और निर्यात की संभावनाएं कैसे विकसित हो सकती हैं।

नीदरलैंड के एक प्रतिष्ठित विश्वविद्यालय से जुड़े वैज्ञानिकों ने बताया कि यूरोप में इसबगोल का उपयोग स्वास्थ्य के दृष्टिकोण से व्यापक रूप से किया जाता है। ऐसे में वे भारत में इसकी उत्पादन प्रक्रिया, गुणवत्ता सुधार और सुरक्षा मानकों को समझने के लिए अध्ययन कर रहे हैं।

स्थानीय सहयोगी अरविंद पाटीदार ने बताया कि वैज्ञानिकों का उद्देश्य खेती से लेकर बाजार व्यवस्था, प्रोसेसिंग और निर्यात प्रणाली को समझना है, ताकि भविष्य में गुणवत्ता सुधार और नए अवसर विकसित किए जा सकें।

विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के अंतरराष्ट्रीय अध्ययन से किसानों को नई तकनीक, बेहतर उत्पादन और वैश्विक बाजार तक पहुंच बनाने में मदद मिलेगी। मंदसौर में इसबगोल की बढ़ती लोकप्रियता से यह क्षेत्र धीरे-धीरे अंतरराष्ट्रीय कृषि अनुसंधान का केंद्र बनता जा रहा है।
