उज्जैन। आगरनाका निवासी अजहर की पत्नी राहमीन के प्रसव के बाद नवजात शिशु की हालत गंभीर हो गई थी। जन्म के तुरंत बाद शिशु सांस नहीं ले पा रहा था और उसकी धड़कन भी बेहद कमजोर थी, जिससे उसकी जान पर खतरा मंडरा रहा था।
परिजनों ने तत्काल शिशु को जिला चिकित्सालय के चरक भवन स्थित नवजात शिशु गहन चिकित्सा इकाई (एसएनसीयू) में भर्ती कराया। मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. अशोक कुमार पटेल के निर्देशन में डॉ. वैजयंतीमाला अहिरवार और उनकी टीम ने लगातार 16 दिनों तक 24 घंटे निगरानी में उपचार किया।
इस दौरान शिशु को ऑक्सीजन और वेंटिलेटर सपोर्ट दिया गया, जिससे उसकी हालत में धीरे-धीरे सुधार हुआ और अंततः उसे स्वस्थ कर जीवनदान दिया गया। वर्तमान में शिशु पूरी तरह स्वस्थ है और परिवार में खुशी का माहौल है।
डॉ. पटेल ने बताया कि निजी अस्पताल में इस तरह के उपचार पर 3 से 4 लाख रुपये तक खर्च हो सकता था, जबकि जिला अस्पताल में यह संपूर्ण इलाज निःशुल्क किया गया। चरक अस्पताल की एसएनसीयू में गंभीर नवजातों के लिए उन्नत चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध हैं।