सिंगोली। नगर में चल रहे पंचकल्याणक महोत्सव के पांचवें दिन विविध धार्मिक अनुष्ठानों के साथ केवलज्ञान कल्याणक एवं तीर्थंकर आदिनाथ भगवान की आहार चर्या का आयोजन श्रद्धा एवं भक्ति के साथ संपन्न हुआ।
प्रातःकाल 6 बजे जाप आराधना, मंगलाष्टक, अभिषेक, शांतिधारा, नित्य पूजन, ज्ञान कल्याणक पूजन एवं हवन जैसे कार्यक्रम आयोजित किए गए। इस अवसर पर अर्हम योग प्रणेता मुनि श्री प्रणम्य सागर महाराज ने अपनी अमृत वाणी में धर्माेपदेश देते हुए कहा कि यह संसार नश्वर है।
उन्होंने चक्रवर्ती भरत और उनके भ्राता बाहुबली के प्रसंग का उल्लेख करते हुए बताया कि सत्ता और अहंकार के बावजूद अंततः वैराग्य ही जीवन का सार है। मुनि श्री ने कहा कि बाहुबली ने कठोर तपस्या के बाद वैराग्य प्राप्त कर मोक्ष की दिशा में अग्रसर हुए।
उन्होंने यह भी बताया कि कर्नाटक के श्रवण बेलगोला स्थित विंध्यगिरी पर्वत पर भगवान बाहुबली की लगभग 57-58 फीट ऊंची विश्व प्रसिद्ध प्रतिमा स्थापित है, जो त्याग और तपस्या का प्रतीक है।
कार्यक्रम के दौरान केवलज्ञान कल्याणक महोत्सव का महत्व बताया गया तथा तीर्थंकर आदिनाथ भगवान की प्रथम आहार चर्या में अनेक श्रद्धालुओं ने आहार दान का पुण्य लाभ प्राप्त किया।
दोपहर सत्र में मंत्र आराधना, आदिवासना, तिलकदान, नेत्रोन्मीलन, प्राण प्रतिष्ठा, केवलज्ञान उत्पत्ति, समवशरण रचना एवं ज्ञान कल्याणक पूजन के कार्यक्रम आयोजित किए गए। इस दौरान मुनि श्री ने मंगल देशना भी दी।
महोत्सव में जैन समाज के महिला-पुरुष, युवक-युवतियों सहित बड़ी संख्या में श्रावक-श्राविकाएं उपस्थित रहे।