निंबाहेड़ा। 21वें कल्याण महाकुंभ के द्वितीय दिवस आषाढ़ कृष्ण द्वितीया पर वेदपीठ में विराजित ठाकुर श्री कल्लाजी सहित पंचदेवों का 21 द्रव्यों से महाभिषेक कर आकर्षक श्रृंगार किया गया। सतरंगी पुष्पों से सजी वेदपीठ के मध्य ठाकुर जी को पारंपरिक व्यंजनों का छप्पन भोग अर्पित किया गया। मनमोहक झांकी और भव्य सजावट ने श्रद्धालुओं को भाव-विभोर कर दिया।
महाकुंभ के प्रथम दिवस रात्रि में कथा मंडपम में पंडित हनुमान प्रसाद एवं साथियों द्वारा संगीतमय सुंदरकांड पाठ किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए।
इधर, श्री लिंग महापुराण कथा के द्वितीय दिवस भानपुरा पीठ के शंकराचार्य स्वामी ज्ञानानंद तीर्थ ने भगवान शिव की उपासना, शिवलिंग की महिमा और साधना के महत्व पर प्रवचन दिए। उन्होंने कहा कि शिवलिंग अणु से भी सूक्ष्म और ब्रह्मांड से भी विराट है। श्रद्धा, विश्वास, गुरु मार्गदर्शन और निरंतर साधना से ही आध्यात्मिक उन्नति संभव है। उन्होंने सत्य, सेवा, परोपकार, जलाभिषेक एवं रुद्राभिषेक को शिवभक्ति का प्रमुख आधार बताया।
प्रवचन से पूर्व स्वामी ज्ञानानंद तीर्थ ने वेदपीठ पहुंचकर ठाकुर जी के मनोहारी श्रृंगार के दर्शन किए तथा व्यासपीठ पर पूजा-अर्चना की। इस अवसर पर पंडित प्रह्लाद कृष्ण ने शिवभक्ति से ओत-प्रोत भजनों की प्रस्तुति दी।
महाकुंभ के तृतीय दिवस शुक्रवार रात्रि को कथा मंडपम में अखिल भारतीय विराट कवि सम्मेलन का आयोजन होगा। इसमें देशभर के प्रतिष्ठित कवि वीर रस, ओज और अन्य विधाओं की रचनाओं का काव्यपाठ करेंगे।