नीमच। खाद्य पदार्थों में मिलावट के खिलाफ प्रशासन द्वारा समय-समय पर कार्रवाई की जाती है। छापेमारी की खबरें अखबारों और मीडिया में प्रमुखता से प्रकाशित होती हैं, लेकिन कार्रवाई के बाद जांच में क्या सामने आया और संबंधित के खिलाफ क्या कदम उठाए गए, इसकी जानकारी आमजन तक बहुत कम पहुंच पाती है। इस मुद्दे पर जिला योजना समिति के पूर्व सदस्य डॉ. पृथ्वीसिंह वर्मा ने संबंधित विभागों से कार्रवाई के अंतिम निष्कर्ष सार्वजनिक करने की मांग की है।
डॉ. वर्मा ने बयान जारी कर कहा कि खाद्य पदार्थों में मिलावट के मामलों में प्रशासन द्वारा की जाने वाली छापेमारी की जानकारी तो जोर-शोर से प्रसारित की जाती है, लेकिन बाद में यह स्पष्ट नहीं हो पाता कि संबंधित सामग्री मिलावटी पाई गई या नहीं, जांच रिपोर्ट में क्या सामने आया और दोषी पाए जाने पर संबंधित व्यक्ति के खिलाफ क्या कार्रवाई की गई। जनता को इन सभी तथ्यों की जानकारी मिलनी चाहिए।
व्यापारियों की प्रतिष्ठा और उपभोक्ताओं का भरोसा भी जरूरी-
डॉ. वर्मा ने कहा कि किसी व्यापारी या दुकानदार के यहां छापेमारी होने पर वह संदेह के दायरे में आ जाता है। ऐसे में जांच के बाद सामग्री के नमूनों को किस प्रयोगशाला में भेजा गया, रिपोर्ट में क्या निष्कर्ष निकला और सामग्री मिलावटयुक्त पाई गई या नहीं, इसकी जानकारी सार्वजनिक की जानी चाहिए।
उन्होंने कहा कि यदि जांच में सामग्री मिलावट रहित पाई जाती है और इसकी जानकारी सार्वजनिक नहीं की जाती, तो संबंधित व्यापारी की प्रतिष्ठा और ग्राहकी पर प्रतिकूल असर पड़ सकता है। वहीं, यदि सामग्री मिलावटी पाई जाती है, तो संबंधित के खिलाफ हुई कार्रवाई, जुर्माने और सजा की जानकारी भी सार्वजनिक होनी चाहिए, ताकि उपभोक्ता जागरूक रहें और खरीदारी करते समय सतर्कता बरत सकें।
कार्रवाई के अंतिम निष्कर्ष सार्वजनिक करने की मांग-
डॉ. वर्मा ने अपेक्षा जताई कि संबंधित विभाग खाद्य पदार्थों में मिलावट के मामलों में छापेमारी के बाद की जांच, रिपोर्ट और अंतिम कार्रवाई की जानकारी नियमित रूप से सार्वजनिक करने की व्यवस्था सुनिश्चित करें। इससे व्यवस्था में पारदर्शिता बढ़ेगी, व्यापारियों के प्रति निष्पक्षता बनी रहेगी और उपभोक्ताओं के हितों की बेहतर रक्षा हो सकेगी।