नीमच। आगामी दीपावली पर पटाखा बिक्री के लाइसेंस गैर-हिंदू व्यापारियों को जारी नहीं करने की मांग को लेकर प्रकाशित समाचार पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए पूर्व पार्षद एवं समाजसेवी हारून रशीद कुरैशी ने कहा कि किसी व्यापारी को केवल उसके धर्म के आधार पर पटाखा बिक्री के लाइसेंस से वंचित करने की मांग उचित नहीं है। भारत एक लोकतांत्रिक देश है, जहां सभी नागरिकों को समान अधिकार प्राप्त हैं। ऐसे में व्यापारिक गतिविधियों के लिए नियमों का निर्धारण धर्म के बजाय कानून, पात्रता और सुरक्षा मानकों के आधार पर होना चाहिए।
कुरैशी ने कहा कि पटाखा बिक्री के लाइसेंस जारी करते समय संबंधित कानून, निर्धारित शर्तों और सुरक्षा मानकों का पालन सुनिश्चित किया जाना चाहिए। यदि कोई व्यापारी सभी आवश्यक नियमों और शर्तों को पूरा करता है, तो केवल उसकी धार्मिक पहचान के आधार पर उसके साथ अलग व्यवहार करने की मांग उचित नहीं है।
संविधान सभी नागरिकों को समानता का अधिकार देता है-
हारून रशीद कुरैशी ने कहा कि भारतीय संविधान का अनुच्छेद 14 कानून के समक्ष समानता और कानूनों के समान संरक्षण की गारंटी देता है। वहीं, अनुच्छेद 15 में राज्य द्वारा धर्म सहित निर्दिष्ट आधारों पर भेदभाव को प्रतिबंधित किया गया है। संविधान का अनुच्छेद 19(1)(ह) नागरिकों को व्यवसाय और व्यापार करने की स्वतंत्रता भी प्रदान करता है, हालांकि इस पर कानून के तहत उचित प्रतिबंध लगाए जा सकते हैं।
उन्होंने कहा कि पटाखों की बिक्री एक संवेदनशील गतिविधि है, जिसमें सुरक्षा मानकों का पालन अनिवार्य है। यदि कोई व्यापारी आवश्यक लाइसेंस के बिना कारोबार करता है या निर्धारित नियमों का उल्लंघन करता है, तो प्रशासन उसके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई करे। लेकिन नियमों का पालन करने वाले व्यापारियों के साथ धर्म के आधार पर भेदभाव नहीं होना चाहिए।
धार्मिक भावनाओं से जुड़ी आपत्तियों का समाधान कानून के अनुसार हो
कुरैशी ने कहा कि यदि पटाखों की पैकेजिंग पर देवी-देवताओं के चित्रों को लेकर किसी की धार्मिक भावनाएं आहत होने की शिकायत है, तो संबंधित मामले की जांच लागू कानून और नियमों के अनुसार की जानी चाहिए। किसी उत्पाद को लेकर आपत्ति होने पर कानूनी प्रक्रिया अपनाई जा सकती है, लेकिन इसके आधार पर किसी पूरे धार्मिक समुदाय के व्यापारियों को पटाखा बिक्री से बाहर रखने की मांग करना उचित नहीं है।
उन्होंने प्रशासन से अपील की कि पटाखा बिक्री के स्थायी और अस्थायी लाइसेंस जारी करते समय सभी आवेदकों के साथ समान व्यवहार किया जाए। साथ ही, सुरक्षा, पर्यावरण और कानून-व्यवस्था से जुड़े नियमों का निष्पक्ष रूप से पालन सुनिश्चित किया जाए।
त्योहार खुशियां बांटने के लिए हैं, दूरियां बढ़ाने के लिए नहीं-
हारून रशीद कुरैशी ने कहा कि भारत की पहचान विभिन्न धर्मों और संस्कृतियों के लोगों के आपसी सौहार्द और साथ रहने की परंपरा से है। त्योहार समाज को जोड़ने का माध्यम बनने चाहिए, न कि किसी समुदाय के प्रति अविश्वास या भेदभाव का कारण।
उन्होंने कहा कि प्रशासन का दायित्व कानून के दायरे में रहकर सभी नागरिकों के अधिकारों और सुरक्षा की रक्षा करना है। पटाखा बिक्री के लाइसेंस जारी करने में धर्म के बजाय आवेदकों की पात्रता, वैधानिक नियमों और सुरक्षा मानकों को आधार बनाया जाना चाहिए। कुरैशी ने जिला प्रशासन से इस मामले में निष्पक्ष रुख अपनाने और सभी के लिए समान नियम लागू करने की मांग की।