जयपुर। सम्पर्क साहित्य संस्थान के गौरवमय पाँच वर्ष पूरे होने पर आयोजित उत्सव कार्यक्रम हर्षोल्लास से सम्पन्न हुआ। मुख्य अतिथि सुरेश ज्ञानविहार यूनिवर्सिटी के चेयरमैन सुनील शर्मा, विशिष्ट अतिथि लेखक, समीक्षक दीपक महान, कार्यक्रम अध्यक्ष भारतीय प्रशासनिक सेवा अधिकारी व साहित्यकार प्रियंका गुप्ता, अध्यक्ष अनिल लढ़ा, समन्वयक महासचिव रेनू शब्दमुखर ने सरस्वती माँ के चित्र के समक्ष दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया।
इस अवसर पर अध्यक्ष अनिल लढ़ा द्वारा संपादित पुस्तक सम्पर्क एक अहसास व हलद्वानी उत्तराखंड निवासी ललिता कापड़ी की पुस्तक पहचान का विमोचन किया गया। साथ ही संपर्क संस्थान की वेबसाइट का भी लोकार्पण अतिथियों ने समारोहपूर्वक किया।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि ज्ञान विहार विश्वविधालय के चेयरमैन सुनील शर्मा ने इस अवसर पर अपने उद्बोधन में कहा कि किसी को आगे बढ़ाने के लिए किया गया छोटा सा भी योगदान इतिहास रचता है। बोलना न आए भले किसी को मगर उसका काम अपने आप बोलता है। कलम जब बोलती है तो हुक्मरान भी बोना हो जाता है। कार्यक्रम की अध्यक्ष प्रियंका गुप्ता ने अपने आशीर्वचन देते हुए कहा मेरे लिए ये गौरव का क्षण है कि बड़े बड़े लब्धप्रतिष्ठ साहित्यकारों के बीच मेरी साहित्यिक रूप में स्वीकृति है।
विशिष्ट अतिथि के रूप में मूर्धन्य साहित्यकार दीपक महान ने कहा कि साहित्यकार का कोई समूह या जाति नहीं होती, उन्हें मानवता के लिए ही लिखना चाहिए। उसे सत्य से समाज को अवगत करवाने का साहस होना चाहिए। साहित्य पुरोधा से सम्मानित फारुख ने शुभकामनाएं देते हुए पाँच सो सालो तक सम्पर्क संस्थान को बने रहने की बात कही। रेनू शब्द मुखर ने संस्थान के पाँच वर्षों की यात्रा पर प्रकाश डाला। अध्यक्ष अनिल लढ़ा ने स्वागत करते हुए संस्थान के सेव बेटी सेफ बेटी मिशन की जानकारी दी। संचालन डॉ आरती भदौरिया ने किया।
साहित्यकारों का सम्मान समारोह के दौरान ख्यातिप्राप्त साहित्यकारों का सम्मान भी किया गया। साहित्यिक यात्रा की सारथी रेनू शब्दमुखर को संपर्क श्री साहित्य पुरोधा सम्मान से अंलकृत किया गया। वरिष्ठ साहित्यकार दुर्गा प्रसाद अग्रवाल, फारुख आफरीदी, नंद भारद्वाज, प्रबोध गोविल, साहित्य पुरोधा सम्मान से अलंकृत किया गया तथा प्रेम आनन्दकर, डॉ बजरंग सोनी, डॉ अमला बत्रा, वीना करमचंदानी, पुलिस उपाधीक्षक सुनील शर्मा, पंडित श्याम विहारी जोशी को साहित्य प्रेरक सम्मान प्रदान किया गया। इस अवसर पर सम्पर्क श्री सम्मान से भी संपर्क सदस्यों को सम्मानित किया गया।
दूसरे सत्र में हुए काव्य पाठ में कवयित्रियों ने अपनी कविताओं से वाकई उत्सव बना दिया। काव्य पाठ का संचालन जोधपुर से आई डॉ सूरज माहेश्वरी द्वारा किया गया।